भिलाई : न्यूज़ 36 : दुर्ग जिले में सीमांकन व रकबा बैठाने की प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता रजत सुराना ने पत्रकारवार्ता में दावा किया कि विवादित सीमांकन प्रकरणों में टीम फॉर्मेशन के नाम पर सौदेबाजी होती है और पैसे देने वालों के पक्ष में ही सीमांकन किया जाता है। सुराना के अनुसार, राजस्व निरीक्षक सीमांकन प्रकरण को जटिल बताकर पक्षकारों पर दबाव बनाते हैं और मोटी रकम मांगते हैं। उनका आरोप है कि उनसे भी राजस्व निरीक्षक ने 25 लाख की मांग की थी, यह कहते हुए कि काम उसी के पक्ष में होगा जो पैसे देगा। उन्होने कहा कि 1994 से 2005 के बीच खरीदी गई भूमि के बीच 30 व 60 फीट चौड़ी सड़कें छोड़ी गई थीं, जो आज भी मौजूद हैं। इनका रकबा अब तक मूल खसरे में ही दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव से इन सड़क-रास्तों की भूमि को उनकी भूमि खसरा में समायोजित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुराना ने मामले की मिलीभगत की आशंका जताते हुए मांग की है कि पिछले एक साल के सभी विवादित सीमांकन मामलों की जांच हो। राजस्व निरीक्षक विजय शर्मा को तत्काल प्रकरण से अलग कर सीमांकन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। कॉल डिटेल व कॉल रेकॉर्डिंग की जांच भी हो। वहीं, राजस्व निरीक्षक विजय शर्मा ने आरोपों को जांच टीम से हटाने का षड्यंत्र करार दिया है।
बेबुनियाद आरोप
रजत सुराना ने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए वक्त मांगा है। समय दिया गया है। उक्त प्रकरण में विवादित जमीन के संबंधित खसरा नंबर का सीमांकन अभी नहीं हुआ है। उनका आरोप बेबुनियाद और निराधार है। पूरा प्रपंच केवल इस जांच दल से हटाने के लिए रचा गया है। मैं उक्त सर्कल का राजस्व निरीक्षक नहीं हूं। अफसरों के निर्देश पर टीम में सहयोगी के तौर पर शामिल हूं।
विजय शर्मा, (रेवेन्यू इंस्पेक्टर, दुर्ग शहर)
