प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन पर राज्य सरकार की कार्रवाई रदद्
माना – कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत
भिलाई : न्यूज़ 36 : हाईकोर्ट ने दुर्ग जिले के चिकित्सक डा. दुष्यंत खोसला के विरुद्ध पारित जिला बदर आदेश एवं गृह विभाग द्वारा अपील निरस्त करने के आदेश को रदद् कर दिया है। न्यायालय ने माना कि जिला बदर की कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत “की गई तथा वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रद्धा राज ज्योतिषी, प्रमांशु शर्मा एवं संदीप कुमार तिवारी ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया था कि जिला प्रशासन ने बिना प्रभावी सुनवाई का अवसर दिए, गवाहों के बयान पहले ही दर्ज कर लिए तथा जिरह और बचाव का अवसर नहीं दिया। साथ ही केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर जिला बदर का आदेश पारित कर दिया गया। खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि जिला बदर जैसा आदेश किसी व्यक्ति के निवास, आवागमन और आजीविका के मौलिक अधिकारों को
प्रभावित करता है, इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वैधानिक प्रक्रिया कां कड़ाई से पालन आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज होना या लंबित होना जिला बदर का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता तथा अभिलेखों, में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था जिससे यह सिद्ध हो कि याचिकाकर्ता की गतिविधियों से लोक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने आठ जनवरी के जिला बदर आदेश तथा सात मई के अपीलीय आदेश को निरस्त करते हुए याचिका स्वीकार कर ली। ज्ञात हो कि डा. दुष्यंत के खिलाफ नंदिनी नगर थाना में पांच अपराधिक अ प्रकरण दर्ज है।
