Monday, March 16, 2026

सेल कर्मियों ने एमजीबी व पर्क्स में भेदभाव के तर्क को बताया भ्रामक

वेतन विसंगति पर सवालों के घेरे में सेल प्रबंधन

अधिकारियों को 15 प्रतिशत एमजीबी और 35 प्रतिशत पर्क्स का लाभ दिया गया

भिलाई : न्यूज 36 : स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एमजीबी और पर्क्स प्रतिशत में किए गए भारी अंतर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 10 वर्षीय वेतन समझौते के तहत सेल प्रबंधन ने अधिकारियों को 15 प्रतिशत एमजीबी और 35 प्रतिशत पर्क्स का लाभ देते हुए फिटमेंट व पर्क्स को अप्रैल 2020 से प्रभावी कर उसका एरियर भी प्रदान किया, जबकि कर्मचारियों को केवल 13 प्रतिशत एमजीबी और 26.5 प्रतिशत पर्क्स तक सीमित कर दिया गया।

इस असमानता को लेकर सेल प्रबंधन तथा इस्पात मंत्री द्वारा सीएलसी और संसद में दिए गए जवाबों पर अब सेल कर्मियों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रबंधन का तर्क रहा है है कि कर्मचारियों को 2007 और 2012 में दो बार वेज रीविजन का लाभ मिला, जबकि अधिकारियों को केवल एक बार 2007 में ही वेज रीविजन दिया गया, इसलिए अधिकारियों को अधिक एमजीबी और पर्क्स देना उचित है। कर्मियों का कहना है कि यह तर्क न केवल भ्रामक, बल्कि तथ्यों से परे है।

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कर्मियों के अनुसार वर्ष 2007 के वेज रीविजन में, अधिकारियों को एकमुश्त 30 प्रतिशत एमजीबी और 46 प्रतिशत पर्क्स का लाभ दिया गया था, साथ ही पर्क्स का एरियर भी प्रदान किया गया था। इसके विपरीत कर्मचारियों को उसी वेज रीविजून में केवल 21 प्रतिशत एमजीबी दिया गया। पर्क्स प्रतिशत के स्थान पर कर्मचारियों को मात्र 2 रुपये की चाय, 32 रुपये की कैंटीन सुविधा, 1000 रुपये मासिक पेट्रोल भत्ता तथा चार वर्ष में एक बार एलटीसी/एलएलटीसी जैसी सीमित सुविधाएं दी गईं, जिनमें आगे कभी कोई सुधार नहीं किया गया। कर्मियों का दावा है कि 2007 से दिसंबर 2011 के बीच 18 हजार से अधिक कर्मचारी केवल 21 प्रतिशत एमजीबी के साथ ही सेवानिवृत्त हो गए, जबकि इसी अवधि में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को 30 प्रतिशत एमजीबी का लाभ मिला। अधिकारी वर्ग को बेसिक वेतन के 46 प्रतिशत तक पर्क्स दिए गए, जबकि कर्मचारियों का कुल भत्ता औसतन केवल 25 से 35 प्रतिशत के बीच ही सीमित रहा।

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वर्ष 2012 के वेज रीविजन में कर्मचारियों को 17 प्रतिशत एमजीबी का -लाभ मिला तथा पुराने नियत भत्तों के साथ केवल छह प्रतिशत वैरिएबल पर्क्स दिए गए। वहीं डीपीई के सातवें वेज़ रीविजन गाइडलाइन में स्पष्ट कहा गया था कि दो पांच वर्षीय वेज रीविजन का औसत 10 वर्षीय वेज रीविजन से अधिक नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों को पहले पांच वर्षों में 21 प्रतिशत और अगले पांच वर्षों में 17 प्रतिशत का लांभ मिला, जिसका औसत मात्र 29.5 प्रतिशत ही बैठता है, जिसे कर्मी डीपीई गाइडलाइन के अनुरूप बताते हैं।

जुलाई 2014 में हुए एमओए के बाद भी कर्मचारियों को औसतन केवल 13 से 26 प्रतिशत के बीच पर्क्स मिले, जबकि अधिकारी वर्ग 46 प्रतिशत पर्क्स का लाभ उठाता रहा। दोनों वेज रीविजन डीपीई गाइडलाइन के अनुसार किए गए थे और उस समय न इस्पात मंत्रालय और न ही डीपीई मंत्रालय ने इस पर कोई आपत्ति दर्ज की थी।
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प्रबंधन द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एमजीबी और पर्क्स में किया गया अंतर पूरी तरह भेदभावपूर्ण है। वर्ष 2007 में अधिकारियों को 30 प्रतिशत एमजीबी और 46 प्रतिशत पर्क्स का लाभ दिया गया, जबकि -कर्मचारियों को केवल 21 प्रतिशत एमजीबी तक सीमित रखा गया, जिससे हजारों कर्मचारी कम लाभ के साथ सेवानिवृत्त हो गए।2012 के वेज रीविजन में भी कर्मचारियों को सिर्फ 17 प्रतिशत एमजीबी और नाममात्र के वैरिएबल पर्क्स दिए गए। डीपीई की गाइडलाइन के अनुसार कर्मचारियों के दोनों वेज रीविजन पूरी तरह नियमसम्मत थे और उस समय मंत्रालय ने इस पर आपत्ति दर्ज नहीं की थी। :- रणधीर सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ

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