हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने दंतेवाड़ा से किया वर्चुअल उद्घाटन
दुर्ग : न्यूज़ 36 : जिला न्यायालय में चेक बाउंस के प्रकरणों को लेकर विशेष लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया। दंतेवाड़ा से हाईकोर्ट के न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने इसका वर्चुअल उद्घाटन किया। कुल 449 मामलों का निराकरण किया गया। करीब 13,88,05,129 की समझौता राशि रही। धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 के तहत प्रकरणों को सुलह के लिए रखा गया। इस अवसर पर प्रदेश के समस्त जिले के न्यायाधीशगण वर्चुअल माध्यम से जुड़े। सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं संबंधित बैंकों से समन्वयपूर्वक कार्य करने की अपील की गई। दुर्ग जिले में कुल 15 खंडपीठ का गठन किया गया था, जिनके द्वारा कुल 1001 प्रकरण चिन्हांकित किए गए थे। लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को आपसी समझौते एवं सौहार्दपूर्ण संवाद के माध्यम से विवादों का त्वरित, कम खर्चीला एवं स्थायी समाधान उपलब्ध कराना था।
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की भावना के अनुरूप आयोजित इस विशेष लोक अदालत ने सिद्ध किया कि आपसी सहमति के माध्यम से विवादों का समाधान न्याय प्राप्ति का सबसे प्रभावी एवं व्यवहारिक माध्यम है। इस विशेष लोक अदालत में अपेक्षित एवं उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुए, जिसके पीछे जिला स्तर पर की गई सुनियोजित रणनीति, सतत समन्वय एवं व्यापक पूर्व तैयारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिला न्यायाधीश के विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा राठौर एवं अंजली सिंह की एक विशेष टीम गठित की गई थी। उक्त टीम द्वारा संबंधित अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों से निरंतर संपर्क स्थापित करते हुए उन्हें आपसी संवाद एवं समझौते के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, प्रकरणवार सतत अनुश्रवण एवं समन्वय के माध्यम से अधिकाधिक मामलों के सौहार्दपूर्ण निराकरण हेतु अथक एवं सराहनीय प्रयास किए गए।
सुलह के लिए पक्षकारों को किया गया प्रेरित
विशेष लोक अदालत की सफलता में मध्यस्थता केन्द्र की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। – मध्यस्थ न्यायाधीशों द्वारा अनेक प्रकरणों में पक्षकारों को धैर्यपूर्वक समझाइश देकर, संवाद की सकारात्मक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आपसी सहमति का वातावरण निर्मित किया गया, जिसके फलस्वरूप अनेक मामलों में सफल समझौते संभव हो सके। मध्यस्थता केन्द्र की यह सक्रिय – भूमिका विशेष लोक अदालत की सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार सिद्ध हुई। जिला अधिवक्ता संघ का सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता रही। अधिवक्ताओं द्वारा अपने-अपने पक्षकारों को आपसी सहमति एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए प्रेरित करते हुए प्रकरणों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
ऐसी लोक अदालतों से कोर्ट में कम होता है प्रकरणों का भार
विशेष लोक अदालत में दुर्ग जिले के विभिन्न विधि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की सहभागिता भी अत्यंत सराहनीय रही। विद्यार्थियों की यह सहभागिता न केवल उनके व्यावहारिक विधिक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण अवसर बनी, बल्कि समाज में वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के प्रति जागरूकता एवं विश्वास को सुदृढ़ करने की दिशा में भी प्रभावी सिद्ध हुई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने इस विशेष लोक अदालन की सफलता में सहयोग प्रदान करने वाले सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थ न्यायाधीशों, न्यायालयीन कर्मचारियों एवं पक्षकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी इसी प्रकार आपसी समझौते एवं संवाद की भावना को बढ़ावा देकर न्याय को अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाया जाता रहेगा।
