Sunday, July 19, 2026

सेक्टर-9 निजीकरण पर सिंहदेव ने सरकार को घेरा, बोले-सरकारी अस्पतालों का निजीकरण जनहित के खिलाफ

PCC अध्यक्ष बनने की अटकलों से इनकार

भिलाई : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भिलाई के सेक्टर-9 स्थित जवाहरलालनेहरू चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध करते हुए राज्य सरकार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अस्पताल का नहीं, बल्कि सरकार की सोच और जनस्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। सिंहदेव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने की अटकलों को भी खारिज किया।

सस्ती स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बना था अस्पताल

सिंहदेव ने कहा कि सेक्टर-9 अस्पताल की स्थापना लोगों को लगभग निशुल्क और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। ऐसे संस्थान कानिजीकरण जनहित और पंडित जवाहरलाल नेहरू की जनकल्याणकारी सोच के विपरीत है।

“सरकारी संसाधन, कमाई निजी संस्थाओं की”

उन्होंने कहा कि सरकारी भवन, मशीनें और अन्य संसाधन निजी संस्थाओं को सौंपकर उनसे मरीजों से शुल्क वसूलने देना उचित नहीं है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के इलाज का खर्च बढ़ेगा।

यूनिवर्सल हेल्थ केयर पर दिया जोर

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श व्यवस्था में मरीज को दवा, जांच, भर्ती और इलाज के लिए अपनी जेब से पैसे नहीं देने पड़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि यही यूनिवर्सल हेल्थ केयर का मूल सिद्धांत है और सरकार को उसी दिशा में काम करना चाहिए।

सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर हाथ खड़े कर दिए

सिंहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार एक-एक कर सरकारी संस्थानों का निजीकरण कर रही है, जिससे ऐसा लगता है कि उसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी ढंग से चलाने की जिम्मेदारी छोड़ दी है।

PCC अध्यक्ष बनने की अटकलों पर विराम

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं पर सिंहदेव ने कहा कि वह किसी दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल कांग्रेस हाईकमान का पूरा ध्यान उन राज्यों पर है, जहां 2027 की शुरुआतमें विधानसभा चुनाव होने हैं। छत्तीसगढ़ संगठन को लेकर अभी कोई चर्चा शुरू नहीं हुई है।

अभी हाईकमान का पूरा फोकस दूसरे राज्यों पर

सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व का वर्तमान ध्यान उन राज्यों पर केंद्रित है, जहां 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और अन्य राज्यों की रणनीति फिलहाल प्राथमिकता है।

उन्होंने माना कि छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक फैसलों में बहुत अधिक देरी भी नहीं होनी चाहिए, लेकिन अभी तक दिल्ली में प्रदेश नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।

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