भिलाई : न्यूज़ 36 : महिला अधिवक्ता बलबीर कौर (चौहान) की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में जिला प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। स्मृति नगर स्थित हाईटेक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक नवंबर को महिला अधिवक्ता की मौत हुई थी। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने और मरीज की वास्तविक स्थिति की सही जानकारी नहीं देने के गंभीर आरोप लगाए थे। मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। अब कलेक्टर ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट और सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, महिला अधिवक्ता बलबीर कौर (चौहान) को इलाज के लिए दुर्ग के स्मृति नगर स्थित हाईटेक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक नवंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। महिला अधिवक्ता की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की उपचार प्रक्रिया पर सवाल उठाए। परिजनों का आरोप था कि इलाज में लापरवाही बरती गई और मरीज की बिगड़ती तबीयत के संबंध में उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई। इस घटना के बाद दुर्ग जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में वकीलों ने अस्पताल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया था। अधिवक्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही थी। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और इलाज के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी उठाई गई थी।
अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित कलेक्टर की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अपर कलेक्टर वीरेन्द्र सिंह को जांच समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग डॉ. मनोज दानी, जिला अस्पताल की गायनिकोलॉजिस्ट डॉ. स्मिता सिन्हा और जिला अस्पताल की जनरल सर्जन डॉ. सरिता मिंज को सदस्य बनाया गया है। इस समिति को महिला अधिवक्ता की मौत से जुड़े पूरे मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति को जांच पूरी कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट के साथ आवश्यक सुझाव भी देने के निर्देश जारी किए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के आरोपों को नकारा दूसरी ओर, हाईटेक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. नवील शर्मा ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने से इनकार किया था। उन्होंने बताया था कि ऑपरेशन के दौरान महिला मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। स्थिति को देखते हुए एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ने तत्काल ऑपरेशन रुकवा दिया था। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, डॉक्टरों को मरीज में पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने की आशंका हुई थी। यह ऐसी स्थिति होती है, जिसमें फेफड़ों की रक्त वाहिका में खून का थक्का जमने से रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है। अस्पताल के मुताबिक, मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल सीपीआर, आवश्यक दवाइयां और अन्य उपचार दिए गए थे।
इसके बाद आईसीयू में भी डॉक्टरों की टीम ने मरीज को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया कि उपचार के दौरान जरूरी चिकित्सकीय प्रयास किए गए थे। फिलहाल महिला अधिवक्ता की मौत के मामले में परिजनों के आरोपों और अस्पताल प्रबंधन के दावों की जांच के लिए समिति गठित हो चुकी है। अब 15 दिनों के भीतर आने वाली जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उपचार प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।
