Monday, August 24, 2026

फर्जी हस्ताक्षर से प्लॉट की सदस्यता और NOC ली, तीन के खिलाफ FIR

आनंद सहकारी गृह निर्माण मर्यादित समिति दुर्ग का मामला

दुर्ग : न्यूज़ 36 : आनंद सहकारी गृह निर्माण मर्यादित समिति दुर्ग की शिकायत पर पद्मनाभपुर पुलिस ने फर्जी हस्ताक्षर कर समिति की सदस्यता और भूखंड की एनओसी हासिल करने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। मामले में अविनाश सिंह गुप्ता, डॉ. अपूर्वा गुप्ता और श्रीमती मोनिका गुप्ता को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने अपराध क्रमांक 0483/26 दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।

मामला आनंद नगर, दुर्ग स्थित आनंद सहकारी गृह निर्माण मर्यादित समिति के भूखंड क्रमांक 9 से जुड़ा है। समिति के अध्यक्ष ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग की अदालत में धारा 175(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने 13 अगस्त 2026 को पुलिस को एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे।

डॉ. अपूर्वा के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

परिवाद के मुताबिक आरोपी अविनाश सिंह गुप्ता ने भूखंड क्रमांक 9 खरीदने के लिए 17 मार्च 2022 को सहमति पत्र, 28 मार्च 2022 को समिति की सदस्यता के लिए आवेदन और उसी दिन एनओसी के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। इन दस्तावेजों में डॉ. अपूर्वा गुप्ता के हस्ताक्षर किए गए थे। सदस्यता संबंधी आवेदन में मोनिका गुप्ता ने बतौर साक्षी हस्ताक्षर किए थे।

समिति के संचालक मंडल की 16 सितंबर 2024 और 3 अक्टूबर 2024 की बैठक के प्रस्ताव पंजी तथा भूखंड के पंजीकृत बैनामे में डॉ. अपूर्वा गुप्ता के हस्ताक्षरों से इन आवेदनों के हस्ताक्षर अलग पाए जाने का दावा किया गया। इसके बाद समिति ने हस्ताक्षरों की जांच फोरेंसिक कंसल्टेंसी से कराई।

फोरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट में विवादित आवेदनों पर किए गए डॉ. अपूर्वा गुप्ता के हस्ताक्षरों को कूटरचित/फर्जी बताया गया। समिति का आरोप है कि इसी आधार पर अविनाश सिंह गुप्ता ने मोनिका गुप्ता के सहयोग से षड्यंत्रपूर्वक समिति की सदस्यता और एनओसी हासिल की।

पहले थाने और एसपी को दी थी शिकायत

समिति के अध्यक्ष के अनुसार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए 5 नवंबर 2025 को पद्मनाभपुर थाने तथा 10 नवंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक दुर्ग को लिखित शिकायत दी गई थी। इसके बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने पर समिति ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और फोरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया कूटरचित हस्ताक्षरों के आधार पर समिति की सदस्यता और भूखंड संबंधी अधिकार हासिल करने के आरोप सामने आते हैं। न्यायालय ने यह भी माना कि मामले में दस्तावेजों का संकलन, साक्षियों के बयान और हस्तलेख की तुलनात्मक जांच सहित विस्तृत विवेचना आवश्यक है।

आरोपियों ने विवाद को सिविल प्रकृति का बताया

आरोपियों की ओर से दिए गए जवाब में मामले को समिति और पक्षकारों के बीच चल रहे सिविल विवाद तथा वर्ष 2024 के समिति चुनाव से उत्पन्न वैमनस्य से प्रेरित बताया गया। बचाव पक्ष ने सदस्यता शुल्क के भुगतान, सदस्यता पत्र की सुपुर्दगी और पूर्व भू-स्वामी द्वारा भूखंड की सदस्यता हस्तांतरित किए जाने संबंधी दस्तावेजों का भी उल्लेख किया।

हालांकि न्यायालय ने कहा कि इन तथ्यों की सत्यता या असत्यता का परीक्षण विस्तृत विवेचना में किया जाना है। इसके बाद न्यायालय ने आवेदन स्वीकार करते हुए पुलिस को संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच के निर्देश दिए।

न्यायालय के आदेश के पालन में पद्मनाभपुर पुलिस ने आरोपी अविनाश सिंह गुप्ता, डॉ. अपूर्वा गुप्ता और श्रीमती मोनिका गुप्ता के खिलाफ धारा 120-बी,416, 420, 467 और 468 भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध क्रमांक 0483/26 दर्ज कर विवेचना में लिया है।

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