किसानों और आम लोगों को ग्लाइफोसेट से जुड़े स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों के प्रति सचेत कर रहे
भिलाई : न्यूज़ 36 : देशभर में आंशिक रूप से प्रतिबंधित खरपतवार नाशक ग्लाइफोसेट-बेस्ड हर्बिसाइड के विरुद्ध जनजागरण के लिए अखिल भारतीय स्तर की संस्था पेस्ट मैनेजमेंट एसोसिएशन-पुणे (पीएमए) ने छत्तीसगढ़ में अभियान शुरू किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में इस कीटनाशक के दुष्प्रभाव से अवगत कराया जा रहा है। वहीं इस संबंध में सेमीनार और वर्कशॉप की भी तैयारी है। ‘पीएमए’ छत्तीसगढ़ क्षेत्र प्रमुख मुहम्मद मजहर नदीम ने बताया कि संस्थान के प्रेसीडेंट रोहित जाटव की मौजूदगी में होने वाली वर्कशॉप में समूचे छत्तीसगढ़ के सभी पेस्ट कंट्रोल के सेवा प्रदाताओं को आमंत्रित किया जा रहा है। जिससे जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव हो। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों और आम लोगों को ग्लाइफोसेट से जुड़े स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों के प्रति सचेत करना तथा भारत सरकार के नियमों के अनुसार इसके नियंत्रित उपयोग के बारे में जागरूक करना है।
मजहर नदीम ने बताया कि देश में ग्लाइफोसेट आधारित हर्बिसाइड पर आंशिक प्रतिबंध है और इसके इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध और नियम लागू किए गए हैं। जिसमें केंद्र सरकार ने ग्लाइफोसेट की बिक्री, वितरण या उपयोग के लिए सिर्फ पंजीकृत पेस्ट कंट्रोल सेवा प्रदाताओं को अधिकृत किया है। आम किसान या आम व्यक्ति सीधे तौर पर इसे खरीदकर फसलों पर नहीं छिड़क सकते हैं।
मजहर नदीम ने बताया कि हाल ही में ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेचुरल रिसोर्सेज एंड लाइफ़ साइंसेज़ (बोकू) वियना के शोधकर्ताओं ने ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल वाले देशों में किए गए अध्ययन के चौंकाने वाले नतीजे प्रकाशित किए हैं। इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। इस अध्ययन में पाया गया है कि ग्लायसोफेट के इस्तेमाल वाली जमीन में केंचुओं की गतिविधि और मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा में बदलाव हो रहा है। इससे पता चलता है कि हर्बिसाइड के संपर्क में आने से सिर्फ़ इंसानों और जानवरों पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी प्रभाव पड़ रहा हैं। आमतौर पर छत्तीसगढ़ में किसान इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इसकी मारक क्षमता अच्छी होती है। लेकिन इसका नुकसान दीर्घकालीन रहता है।
