Thursday, July 23, 2026

17.50 लाख की धोखाधड़ी, पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर FIR का आदेश

शीघ्र ही मोहन नगर पुलिस द्वारा दर्ज की जाएगी प्राथमिकी

भिलाई : न्यूज़ 36 : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑफ-स्पिनर राजेश चौहान कानूनी पचड़े में फंसते ना आ रहे हैं। छत्तीसगढ के दुर्ग जिले की अदालत ने बिजनेसमैन और ठेकेदार से 17 लाख 52 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में मोहन नगर पुलिस को केस दर्ज कर जांच के कड़े निर्देश दिए हैं।

बड़े नामों और ऊंचे संपर्कों का दिया झांसा

पीडित ठेकेदार दिनकर विश्वमित्र ने शिकायत में बताया कि उनकी पहचान दोस्त सरोज कुमार के जरिए राजेश चौहान से हुई थी। चौहान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताते हुए उद्योगपति नवीन जिंदल से करीबी रिश्तों का दावा किया था। उन्होंने झांसा दिया कि उनकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में बड़ा ट्रांसपोर्ट ठेका मिला है।

फर्जी वर्क ऑर्डर के दम पर साझेदारी का दिया लालच

राजेश चौहान ने दिनकर को ट्रकों के माध्यम से काम करने और भारी मुनाफा कमाने का ऑफर दिया।
भरोसे को पक्का करने के लिए जिंदल इस्पात के नाम का कथित फर्जी वर्क ऑर्डर और कानूनी दस्तावेज भी दिखाए गए। लुभावने ऑफर के झांसे में आकर पीडित ठेकेदार काम में साझेदारी के लिए राजी हो गया।

इकरारनामा और किश्तों में ऐठे लाखों रुपये

ज्ञात हो कि 30 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों के बीच लिखित इकरारनामा हुआ। पीडित ने पहली किश्त के रूप में 2 लाख 51 हजार रुपये नगद दिए। इसके बाद आरोपी के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो अलग-अलग किश्तों में 15 लाख 1 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। इस तरह चौहान ने कुल 17 लाख 52,000 रुपये ऐंठ लिए।

जिंदल प्लांट पहुंचने पर हुआ खुलासा

काफी समय बीत जाने के बाद भी जब ट्रांसपोर्ट का काम शुरू नहीं हुआ, तब पीडित खुद ओडिशा स्थितजिंदल इस्पात के प्लांट पहुंचा। वहां कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करने पर उसके होश उड़ गए। अधिकारियों ने साफ कर दिया कि राजेश चौहान या उनकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को कोई भी ठेका नहीं दिया गया है, और प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं।

पुलिस से नहीं मिली राहत तो खटखटाया अदालत का दरवाजा

धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीडित ने तुरंत मोहन नगर थाना और दुर्ग एसपी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, पुलिस स्तर पर कोई कार्रवाई न होने पर पीडित ने अपने वकील सौरभचौबे के जरिए अदालत का रुख किया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175 (3) के तहत याचिका दाखिल की।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी-प्रथम दृष्टया अपराध बनता है
अदालत ने पेश किए गए बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड्स, इकरारनामे और अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया।

कोर्ट ने माना कि यह संज्ञेय अपराध का मामला बनता है। इसके बाद अदालत ने मोहन नगर थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने और अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदे किया।

एक-दो दिन में दर्ज होगी FIR

प्रशिक्षु आईपीएस एवं नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग हर्षित मेहर ने कहा कि कल देर रात्रि न्यायालय का आदेश प्राप्त हुआ था। जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए मोहन नगर पुलिस के द्वारा जांच शुरु कर दी गई है। क्रिकेटर को नोटिस जारी करके संबंधित दस्तावेज सहित उपस्थित होने कहा गया है। जांच के पश्चात एक-दो दिन में अपराध दर्ज किया जाएगा

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