Tuesday, December 20, 2022

Chhattisgarh Reservation Bill : आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल ने अब तक नहीं किए हस्ताक्षर, कहा- जांच के बाद करूंगी साइन

Chhattisgarh Reservation Bill: छत्तीसगढ़ विधानसभा से पास आरक्षण संशोधन विधेयक पर राज्यपाल के अभी तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, जिस पर उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 58 प्रतिशत आरक्षण को खारिज किया है तो 76 प्रतिशत आरक्षण का क्या होगा। ऐसे में आरक्षण विधेयक की पूरी जांच और समीक्षा के बाद ही विधेयक बिल पर साइन किया जाएगा। राज्यपाल अनुसूईया उइके ने कहा कि मैंने केवल आदिवासी वर्ग का आरक्षण बढ़ाने के लिए सरकार को विशेष सत्र बुलाने का सुझाव दिया था। उन्होंने सबका बढ़ा दिया। अब जब कोर्ट ने 58% आरक्षण को अवैधानिक कह दिया है तो 76% आरक्षण का बचाव सरकार कैसे करेगी।

धमतरी पहुंची राज्यपाल अनुसूईया उइके ने आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि हाईकोर्ट ने 2012 के विधेयक में 58% आरक्षण के प्रावधान को अवैधानिक कर दिया था। इससे प्रदेश में असंतोष का वातावरण था। आदिवासियों का आरक्षण 32% से घटकर 20% पर आ गया। सर्व आदिवासी समाज ने पूरे प्रदेश में जन आंदोलन शुरू कर दिया। सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों ने आवेदन दिया। तब मैंने सीएम साहब को एक पत्र लिखा था। मैं व्यक्तिगत तौर पर भी जानकारी ले रही थी। मैंने केवल जनजातीय समाज के लिए ही सत्र बुलाने की मांग की थी। (Chhattisgarh Reservation Bill)

उन्होंने कहा कि मैंने सुझाव के तौर पर कहा था कि अध्यादेश लाना हो तो अध्यादेश लाइए, विशेष सत्र बुलाना हो तो वह बुलाइए। अब इस विधेयक में ओबीसी समाज का 27%, अन्य समाज का 4% और एससी समाज का 1% बढ़ा दिया गया। अब मेरे सामने सवाल यह आ गया कि जब कोर्ट 58% को अवैधानिक घोषित करता है तो यह बढ़कर 76% हो गया। राज्यपाल ने कहा कि केवल आदिवासी का आरक्षण बढ़ा होता तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। अब मुझे यह देखना है कि यह क्वांटिफायबल डाटा कैसा है। दूसरे वर्गों का आरक्षण कैसे तय हुआ है। रोस्टर की तैयारी क्या है।

राज्यपाल ने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और जनरल वर्ग के संगठनों ने मुझे आवेदन देकर विधेयक की जांच करने को कहा है। उन आवेदनों का भी मैं परीक्षण कर रही हूं। एकदम से बिना सोचे-समझे हस्ताक्षर करना ठीक नहीं होगा। राज्यपाल ने बताया कि विशेष सत्र तक उनकी चिंता केवल 2018 के अधिनियम में दिए गए 58% आरक्षण को बचाने की थी। उन्होंने कहा कि अगर 58% वाले को ही बचा लेते तो समाधान हो जाता। अब सरकार ने और शामिल कर लिया तो वह आधार तो मुझे जानना है। 58% वाली स्थिति रहती तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। अभी तो जनरल वालों ने भी मुझे आवेदन दिया है कि इस पर हस्ताक्षर नहीं करना। इसमें हमारे 10% को 4% कर दिया गया है। जिस पर अब सियासत शुरू हो गया है। (Chhattisgarh Reservation Bill)

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