10 जुलाई को धोखाधड़ी के मामले में पुलगांव पुलिस ने किया था गिरफ्तार
दुर्ग : न्यूज़ 36 : पुलगांव थाना पुलिस ने ग्राम अंजोरा स्थित एक प्लॉट की कथित फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कर कई लोगों से रकम लेने के आरोप में पति-पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। ठगी के एक अध्याय मामले में पुलगांव पुलिस के द्वारा दोनों ही पति पत्नी को 10 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने पर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, प्रार्थी अजय चंद्राकर (35 वर्ष), निवासी डिपरापारा वार्ड क्रमांक 39, दुर्ग ने शिकायत दर्ज कराई कि ग्राम अंजोरा स्थित खसरा नंबर 615/10, रकबा 0.0115 हेक्टेयर (1240 वर्गफुट) प्लॉट का सौदा 3 लाख रुपये में नेहा देशमुख एवं उसके पति नोकेश देशमुख से हुआ था। आरोप है कि 27 फरवरी 2026 को इकरारनामा तैयार कर अजय चंद्राकर ने सेल्फ चेक के माध्यम से 2 लाख रुपये बतौर बयाना दिए थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में उसे समाचार पत्रों से जानकारी मिली कि उक्त भूमि की फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कर उसी प्लॉट का सौदा अन्य लोगों, जिनमें सुखदेव सिंह भी शामिल हैं, से भी किया गया है।
आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई लोगों से राशि लेकर धोखाधड़ी की गई।
प्रार्थी की शिकायत के आधार पर थाना पुलगांवमें अपराध क्रमांक 660/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी नोकेश देशमुख एवं नेहा देशमुख के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5), 318(4), 336(3), 338 एवं 340 (2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
जमीन रजिस्ट्री के नाम पर 8 लाख की ठगी के मामले में जेल में बंद पति-पत्नी
पुलगांव पुलिस ने जमीन की रजिस्ट्री कराने के नाम पर 8 लाख की धोखाधड़ी करने के आरोप में नेहा देशमुख और उसके पति नोकेश देशमुख के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी दंपती को 10 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर लिया है। प्रार्थिया संतोषी नेताम निवासी आर्य नगर कोहका ने शिकायत की थी।
मामला इस प्रकार है कि नोकेश ने अपनी पत्नी नेहा देशमुख के नाम ग्राम अंजोरा स्थित खसरा नंबर 615/10 के 1240 वर्गफुट प्लॉट नंबर-8 को 5.50 लाख में बेचने का सौदा किया। पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता नेअलग-अलग तिथियों में ऑनलाइन और नकद मिलाकर 5.20 लाख रुपए दिए। बाद में व्यवसायिक जरूरत बताकर अतिरिक्त रकम मांगी गई, जिस पर उसकी मां श्यामावती जंघेल ने एनईएफटी के माध्यम से 2.80 लाख रुपए आरोपियों के खाते में भेज दिए। पूरी राशि लेने के बावजूद आरोपियों ने जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम नहीं कराई।
