नव आगमन मासिक के जून अंक का हुआ विमोचन
भिलाई : न्यूज़ 36 : हुडको स्थित अगासदिया परिवार ने वयोवृद्ध कवि मोहन भारतीय को स्मृति चिन्ह शाल देकर सम्मानित किया। अगासदिया परिवार के संयोजक डॉ. परदेशीराम वर्मा ने इस दौरान बताया कि देश भर में अपने गीतों के लिए चर्चित 88 वर्षीय प्रसिद्ध कवि मोहन भारतीय ने हमेशा भिलाई का गौरव बढ़ाया है। वे केन्द्रीय सिविल सेवा में सहायक निदेशक रहे और युवावस्था में मेकेनिकल इंजीनियर बनकर भिलाई आए। 1939 में आगरा में जन्में मोहन भारतीय आज भी साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय है।
नव आगमन मासिक के सम्पादक डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा कि हमारी पीढ़ी जब लिखने का अभ्यास कर रही थी, तब मोहन भारतीय स्थापित कवि के रूप में देश भर में चर्चित थे। वह दौर दानेश्वर शर्मा, रमाशंकर तिवारी डॉ. मनराखन लाल साहू रवि श्रीवास्तव और संतोष झांझी का दौर था जिसमें चमकते सितारे मोहन भारतीय थे । उन्होंने अपार यश प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि नव आगमन के जून अंक का विमोचन इस दौरान किया गया। इस अंक में कवि कमलेश चंद्राकर, शायर अब्दुल कलाम के साथ मोहन भारतीय एवं संपादक मंडल का विशेष सहयोग रहा। इस अंक में धमतरी के चर्चित कवि भगवती सेन एवं दुर्ग के पुरानी पीढ़ी के बहुत सम्मानित कवि और संपादक पतिराम साव सहित धमतरी के डूमन लाल ध्रुव, कमलेश चंद्राकर, हेमंत मढ़रिया की रचनाएं सम्मिलित है। राज्य सम्मान प्राप्त कृषि पंडित सुखराम वर्मा को भी अंक में याद किया गया है।
संपादकीय सहयोगी अब्दुल कलाम, महेश वर्मा, राजेन्द्र साहू, नीतीश वर्मा तथा महंत अंतराम समाजसेवी रामसेवक वर्मा और मोहन भारतीय का परिवार विमोचन समारोह में उपस्थित रहा। मैत्री नगर, भिलाई के भारतीय निवास में भावपूर्ण विमोचन समारोह के अवसर पर महंत अंतराम ने संत पवन दीवान का गीत ‘लहर लहर लहरावय मोर महानदी के पानी’ सुनाया। मोहन भारतीय ने अपना प्रसिद्ध गीत ‘अच्छा किया कि साथी तुमने’ सुनाया। कमलेश चंद्राकर ने बालगीत तथा अब्दुल कलाम ने गजल का पाठ किया।
वरिष्ठ नागरिक एवं चिंतक राम सेवक वर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि मेरी उम्र भी चौरासी वर्ष की है। मैं भिलाई इस्पात संयंत्र से रिटायर हुआ। मैं पचास वर्षों से सरल सहज मोहन भारतीय के गीतों को सुनता रहा हूं। वे अद्भुत गीतकार और उदार समाजसेवी हैं।
मोहन भारतीय के सुपुत्र नवीन जैन ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन लेखकों को बचपन से हम सुनते-पढ़ते हुए बड़े हुए उनमें डॉ. परदेशीराम वर्मा का सतत संपर्क हमारे परिवार के साथ हैं। अब उस दौर के कुछ ही लेखक भिलाई में बचे हैं। अगासदिया परिवार के प्राप्ति आभार मानते हुए उन्होंने भिलाई की साहित्य बिरादरी को याद किया।
