भरतमुनि के नाट्यशास्त्र के ऐतिहासिक संदर्भों पर खुली चर्चा से ही समाज को बनाया जा सकता है अधिक समावेशी : राजेश कुमार
भिलाई : न्यूज़ 36 : ‘मूलनिवासी कला साहित्य और फिल्म फेस्टिवल, भिलाई’ के बैनर तले डॉ. अम्बेडकर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, स्टेशन मरोदा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक एवं सांस्कृतिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों, कला और संस्कृति में निहित ऐतिहासिक और सामाजिक पहलुओं पर खुलकर संवाद करना था।इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध नाटककार एवं प्रख्यात नाट्यकर्मी राजेश कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भरतमुनि का नाट्यशास्त्र—जिसे भारतीय परंपरा में ‘पाँचवाँ वेद’ माना जाता है—और प्राचीन स्मृतियों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि उस कालखंड की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था में किस प्रकार की मान्यताएं प्रचलित थीं।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन भारतीय समाज में व्याप्त सामाजिक सांस्कृतिक जातिवादी भेदभाव वाले बहुत से श्लोक हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि नाट्य शास्त्र और मनुस्मृति के लेखन का समय लगभग एक ही समय का है। जहां एक ओर मनुस्मृति ने समाज में क्रमिक ऊंच नीच के जातिगत अवधारणा को कानूनी दर्जा देकर सामाजिक वर्ण विभाजन को पुख्ता करने का काम किया वहीँ नाट्य शास्त्र ने इसी भेदभाव को सांस्कृतिक रूप से मजबूत किया।
उन्होंने प्राचीन ग्रंथों के ऐतिहासिक विश्लेषण पर जोर देते हुए कहा कि रंगमंच और कला के क्षेत्र में इन पहलुओं की सही समझ विकसित करके ही आज के समय में अधिक समावेशी और समतामूलक समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने रंगमंच से जुड़े कलाकारों और प्रगतिशील नागरिकों से अपील की कि वे कला के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए निरंतर सकारात्मक प्रयास करते रहें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ‘मूलनिवासी कला साहित्य और फिल्म फेस्टिवल, भिलाई’ के अध्यक्ष और भिलाई स्टील प्लांट के रिटायर सीजीएम एल. उमाकांत ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से समाज को जोड़ने, वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने और कला के माध्यम से सकारात्मक संदेश प्रसारित करने में बड़ी मदद मिलती है।
इस वैचारिक गोष्ठी और सांस्कृतिक सत्र में छत्तीसगढ़ और देश के विभिन्न हिस्सों से आए कई प्रतिष्ठित रंगकर्मी, साहित्यकार, कलाकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस गरिमामयी उपस्थिति में इप्टा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रसिद्ध रंगकर्मी राजेश श्रीवास्तव, इप्टा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष मणिमय मुखर्जी, शायर मुमताज, नाट्य निर्देशक राकेश बंबार्डे, पंकज मेश्राम, मुहम्मद जाकिर हुसैन, प्रसिद्ध कवि तथा स्क्रिप्ट राइटर लक्ष्मी नारायण कुम्भकार ‘सचेत’, गिल्बर्ट जोसफ अल्बर्ट, भारतीय बौद्ध महासभा भिलाई के पूर्व अध्यक्ष पी जे अंबुरकर, नाटककार विजय शर्मा, रंगकर्मी सुरेश गोंडाले तथा सुलक्ष्मी गोंडाले शामिल रहे। इसके अलावा जन नाट्य मंच से जुड़े कलाकार वासुदेव, जी.डी. राउत, लखन सांगोड़े और रामकेश के साथ-साथ कवि राजन मेश्राम, इंजीनियर मोहन नागदेवे, आशा ताई जुल्मे, जे.पी. धोटे, सुजाता रामटेके, संगीता धोटे, रानू सांगोड़े, माधुरी बरडे, के.पी. बरडे एवं पी.पी. वर्मा भी उपस्थित रहे। साथ ही, डॉ. अम्बेडकर ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बीएसपी सेल के जीएम कमल टंडन और पूर्व अपर कलेक्टर विश्वास मेश्राम की भी विशेष रूप से सहभागिता रही। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अम्बेडकर ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के एस.पी. निगम ने किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक और वैचारिक माहौल को जीवंत बनाते हुए अशोक ढवले, मुरली भाई और पुनाराम कांबले ने प्रेरणादायी भीम गीत प्रस्तुत किए, जिन्हें उपस्थित श्रोताओं ने काफी सराहा।
