Thursday, October 22, 2026

डिजिटल रिपोर्टिंग के बोझ तले दबे स्वास्थ्य कर्मी, मोबाइल और डेटा भत्ता देने की उठी पुरजोर मांग

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कराया मुख्य सचिव विकासशील का ध्यानाकर्षण,कैशलेस चिकित्सा का दायरा बढ़ाकर 200 करोड़ करने की मांग

भिलाई : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य शासकीय विभागों के कर्मचारियों के सामने डिजिटल रिपोर्टिंग से जुड़ी समस्याएं गंभीर रूपरेखा ले चुकी हैं। प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने मुख्य सचिव विकासशील का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए कर्मचारियों के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।
संघ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास, शिक्षा और उच्च शिक्षा समेत तमाम विभागों में राष्ट्रीय कार्यक्रमों की दैनिक रिपोर्टिंग, फोटोग्राफी और वीडियो विभिन्न पोर्टलों पर अपलोड करने की अनिवार्यता है, लेकिन इसके एवज में कर्मचारियों को मोबाइल या डेटा रिचार्ज भत्ता नहीं दिया जा रहा है। व्यक्तिगत उपयोग के लिए रिचार्ज कराए जाने वाले डेटा का अधिकांश हिस्सा शासकीय ऑनलाइन प्रविष्टियों में खर्च हो रहा है, जो कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक परेशानी का बड़ा कारण बन गया है।
संघ के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि डिजिटल इंडिया और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए शासकीय कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। इसके तहत ऑनलाइन स्टेटस अपडेट करने और हितग्राहियों को मोबाइल पर सेवाएं प्रदर्शित करने हेतु हर कर्मचारी को साल में एक बार एंड्रॉइड स्मार्टफोन खरीदने के लिए राशि तथा प्रतिमाह पांच सौ रुपये डेटा रिचार्ज भत्ता दिया जाना आज के समय की सबसे बड़ी और वास्तविक मांग है। सभी विभागों के प्रमुख सचिवों को इस जायज मांग को मुख्य सचिव के समक्ष रखना चाहिए ताकि मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को राहत मिल सके।
इसके अलावा, कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जुड़े मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया गया है। पिछली कैबिनेट में कैशलेस चिकित्सा के लिए स्वीकृत किए गए एक सौ करोड़ रुपये का शासकीय नियम और आदेश इसी कैबिनेट में जारी करने की मांग की गई है। साथ ही, इसमें संशोधन कर पेंशनर्स को भी इस स्वास्थ्य योजना का लाभ देने के लिए स्पष्ट मार्गदर्शिका जारी करने पर बल दिया गया है। संघ का कहना है कि आगामी बजट में कैशलेस चिकित्सा सुविधा का दायरा और बजट स्वरूप बड़ा करते हुए इसे दो सौ करोड़ रुपये किया जाना चाहिए।
इन ज्वलंत मांगों को कैबिनेट की बैठक में रखने और मजबूती से उठाने वाले प्रमुख पदाधिकारियों में प्रांताध्यक्ष अनिल पांडेय, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष आर.डी. दीवान, उप प्रांताध्यक्ष प्रमेश पाल, संभागीय अध्यक्ष अजय नायक, लिपिक संवर्ग संयोजक बी.के. शुक्ला, महामंत्री एस.पी. देवांगन, पी.सी. जेम्स, दुर्ग जिला अध्यक्ष सत्येंद्र गुप्ता, जी. मोहन राव, कविता साहू, जैकलीन डान, केशव दास बंजारे, राघवेन्द्र साहू, खिलावन चंद्राकर और आर. विश्वास सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।

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