Wednesday, July 15, 2026

साइंस कॉलेज दुर्ग के डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव की पर्यावरण अध्ययन पुस्तक का ‘भारत वाणी’ प्रोजेक्ट में चयन

दुर्ग : न्यूज़ 36 : शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (साइंस कॉलेज) दुर्ग के भूगर्भशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. प्रशांत कुमार श्रीवास्तव की लिखित पुस्तक पर्यावरण अध्ययन’ का चयन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की प्रतिष्ठित ‘भारत वाणी’ प्रोजेक्ट के लिए किया गया है। इस उपलब्धि से महाविद्यालय सहित पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत में हर्ष का माहौल है।

देशभर के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर द्वारा संचालित भारत वाणी प्रोजेक्ट का उद्देश्य विषय आधारित पुस्तकों को भारतीय भाषाओं में डिजिटल माध्यम से विद्यार्थियों और आम लोगों तक पहुंचाना है। डॉ. श्रीवास्तव की पुस्तक अब इस पोर्टल पर पीडीएफ स्वरूप में उपलब्ध होगी।

पर्यावरण के महत्वपूर्ण विषयों का समावेश

सिंघई पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में पर्यावरण प्रदूषण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पारिस्थितिक तंत्र, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे समसामयिक विषयों को सरल एवं वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का लेखन शासकीय मॉडल साइंस कॉलेज, रीवा की सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. प्रवीण सिंह तथा शासकीय राधाबाई नवीन कन्या महाविद्यालय, रायपुर की सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रीति श्रीवास्तव के सहयोग से किया गया है।

छत्तीसगढ़ के पहले भूगर्भशास्त्र प्राध्यापक

डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव भूगर्भशास्त्र के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के ऐसे पहले प्राध्यापक हैं, जिनकी पुस्तक को भारत वाणी परियोजना में स्थान मिला है। इससे पहले वे पर्यावरण विषय पर ‘परिवेश’ नामक पुस्तक का भी लेखन कर चुके हैं।

शोध और उपलब्धियों का लंबा सफर

डॉ. श्रीवास्तव के अब तक 50 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वे छत्तीसगढ़ के पहले फुलब्राइट स्कॉलर भी हैं। इसके अलावा उनका चयन कॉमनवेल्थ फेलोशिप, अकादमिक स्टाफ फेलोशिप और यूजीसी पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप के लिए भी हो चुका है।

महाविद्यालय परिवार ने दी शुभकामनाएं

डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर साइंस कॉलेज दुर्ग के प्राचार्य, प्राध्यापकों एवं समस्त महाविद्यालय परिवार ने उन्हें बधाई देते हुए इसे संस्थान और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय बताया।

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