रोचक इतिहास बताने के साथ भविष्य की चिंता भी रखती है ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ : बंछोर
भिलाई एक परिवार की तरह, इसे तोड़ने वालों को सफल नहीं होने देंगे : बंछोर
अस्पताल और टाउनशिप को बचाने ओए-सेफी ने दिया है प्रस्ताव : बंछोर
‘आरंभ’ के तत्वावधान में ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ पर चर्चा-विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने रखे अपने विचार,
लेखक का किया सम्मान, पद्मविभूषण तीजन बाई को दी श्रद्धांजलि
भिलाई : न्यूज़ 36 : प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के तत्वावधान में लेखक-पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की पुस्तक ‘भिलाई ज़िंदाबाद कुछ किस्से-कुछ कहानियां’ पर चर्चा-विचार गोष्ठी भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस सभागार में आयोजित की गई। प्रारंभ में संध्या साटकर ने सरस्वती वंदना की। इसके उपरांत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। स्वागत उद्बोधन ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य एवं आयोजकीय वक्तव्य संयोजक शौकत इकबाल ने दिया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि बीएसपी ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया (सेफी) के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर ने कहा कि लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपनी इस किताब में न केवल भिलाई का इतिहास रोचक ढंग से बताया है बल्कि भिलाई के भविष्य को लेकर गहन चिंता भी व्यक्त की है।
उन्होंने भिलाई के समक्ष आ रही चुनौतियों का खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा कि आज ऐसी परिस्थिति निर्मित की जा रही है कि किसी न किसी तरह भिलाई को निजीकरण की तरफ मोड़ दिया जाए। 2004 में ऐसा प्रयास किया गया था। लेकिन भिलाई की जनता की खासियत है कि अपनी एकजुटता से इसे नाकाम करती रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बीएसपी ओए और सेफी की तरफ ऐसी किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा। अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया कि सेक्टर-9 अस्पताल को लेकर भिलाई वासियों की चिंता जायज है। इसके लिए हमने (ओए-सेफी) प्रस्ताव दिया है मैनेजमेंट भी उस दिशा में आगे बढ़ रहा है कि ह्रदय, किडनी और न्यूरो जैसे विभाग के लिए किसी संस्थान से अनुबंध कर यहां अलग से भवन दिया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर सभी को लाभ मिले।
टाउनशिप के संबंध में उन्होंने बताया कि उपर से यह दबाव जरूर है कि पब्लिक सेक्टर के पास जितनी भी जमीन है उसका मौद्रीकरण किया जाए और जितने पुराने मकान है, उन्हें गिराकर वह जगह किसी फर्म को दी जाए।
इसके लिए ओए-सेफी का प्रस्ताव है कि एनबीसीसी या हाउसिंग बोर्ड जैसे किसी सरकारी उपक्रम को टाउनशिप में ऐसी खाली जगह दी जाए, जहां आवास गिराए जा चुके हैं और अवैध कब्जे हो रहे हैं। जिससे वहां तालपुरी की तरह कालोनी विकसित की जाए और पूरा टाउनशिप उजाड़ने की नौबत न आए। उन्होंने कहा कि भिलाईवासी अपने आप को एक परिवार की तरह मानते हैं और इस परिवार को जो लोग भी तोड़ने का प्रयास करेंगे हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे।
इसके पहले लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि- मौजूदा दौर में सार्वजनिक उपक्रम कई तरह की चुनौतियों से रुबरु हो रहे हैं। अब जबकि पूरा परिवेश ही बदल रहा है तो ऐसे में पाठकों को ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ सौंपते हुए कई सवाल मन में उठ रहे हैं कि क्या भिलाई अपने वजूद को बचा पाएगा?
वहीं आधार वक्तव्य रखते हुए युवा पत्रकार व कवि निलेश त्रिपाठी ने कहा कि उनकी तरह तमाम लोग भिलाई को जानते जरूर हैं लेकिन भिलाई को पहचानना है, इस शहर को समझना है तो आपको ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ जरूर पढ़ना होगा।
विशिष्ट अतिथि सुस्थापित व्यंग्यकार विनोद साव ने किताब में लेखक की दादी मरहूमा फातिमा बी को समर्पित वाक्य ‘आपने बीएसपी सेक्टर-1 अस्पताल के किचन में कोयले की भट्टी के सामने बरसों अपना खून जलाते हुए भरे-पूरे कुनबे को ठंडी छांव दी’ से अपनी बात रखते हुए मैत्री बाग, सेक्टर-9 हॉस्पिटल का जिक्र किया एवं कल और आज के परिदृश्य को बताया।
विशिष्ट अतिथि स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि लेखक ने भिलाई का इतिहास बेहद रोचक ढंग से रखा है और इसे हर भिलाईवासी को जरूर पढ़ना चाहिए।
चर्चा गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ.महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि-विश्व के मानचित्र में ‘भिलाई’ की अपनी एक पहचान है। आज भिलाई की संस्कृति और भिलाई स्टील प्लांट के सार्वजनिक उपक्रम के स्वरूप को बचाए रखने की जरूरत है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय किताब ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ की महत्ता और बढ़ जाती है। आयोजन में संस्था ‘आरंभ’ की तरफ से कृतिकार मुहम्मद जाकिर हुसैन को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त प्रख्यात पंडवानी गुरु पद्म विभूषण स्व. तीजन बाई को दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर आलोक कुमार चंदा, दीप्ति श्रीवास्तव, शानू मोहनन, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर, शेफाली भट्टाचार्य, संध्या साटकर, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, सुशील यादव, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, ब्रजेश मलिक, तारकनाथ चौधुरी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, हाजी रियाज खान गौहर, टीए खान, जाविद हसन ‘भाईजान’, ओमप्रकाश शर्मा, शुभेंदु बागची, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’, नागेंद्र साहू, मो. तारिक, सोनिया नायडू, शिव मंगल सिंह, शमशीर सिवानी, घनश्याम कुमार देवांगन और ‘आरंभ’ के अनेक सदस्य उपस्थित हुए. संचालन महासचिव नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ एवं आभार प्रदर्शन वरिष्ठ उपाध्यक्ष त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’ ने किया। ‘आरंभ’ के प्रवक्ता जाविद हसन ‘भाईजान’ और मीडिया प्रभारी डॉ.नौशाद अहमद सिद्दीकी’सब्र’ने यह जानकारी दी।
