11 आरोपी गिरफ्तार, 1.88 करोड़ का लेनदेन उजागर
भिलाई : न्यूज़ 36 : साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना मोहन नगर और सुपेला पुलिस की संयुक्त टीम ने म्यूल खातों के जरिए संचालित साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि 250 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों के माध्यम से 1 करोड़ 88 लाख 67 हजार 554 रुपये से अधिक की साइबर ठगी की राशि का लेनदेन किया गया।
समन्वय पोर्टल से खुला बड़ा नेटवर्क
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरु की। जांच के दौरान कर्नाटका बैंक (स्टेशन रोड, दुर्ग) के 111 खातों और फेडरल बैंक (दक्षिण गंगोत्री, सुपेला) के 105 खातों सहित कुल 250 से ज्यादा खातों का विश्लेषण किया गया। इन खातों का उपयोग देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर कर अवैध लाभ कमाने के लिए किया जा रहा था।
चार महीनों में 150 से अधिक गिरफ्तारी
दुर्ग पुलिस ने वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में ही इस तरह के मामलों में 150 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो इस संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है।
म्यूल खातों के जरिए ठगी का खेल
पुलिस जांच में पाया गया कि आरोपी अपने बैंक खातों को साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे, जिनमें ठगी की रकम जमा होती थी। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। इस प्रकार ये आरोपी साइबर अपराधियों के लिए फ्यूल अकाउंट” के रूप में काम कर रहे थे।
इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी : पुलिस ने शिवधर साहू, गोविंदा डहरिया, साहिल टेम्बेकर, धर्मेन्द्र सिंह, एस. त्रिमोला, प्रदीप उइके, भोजराज प्रजापति, हेमंत साहू, सत्री बौहान, प्रिया सिंह और आरती मारकण्डे को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
जप्त की गई सामग्री : कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और खातों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।
मामले में थाना मोहन नगर और सुपेला में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना जारी है। पुलिस अन्य खाताधारकों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है।
पुलिस ने की अपील : दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। साथ ही किसी को अपना खाता उपयोग के लिए देना भी अपराध है। साइबर ठगी से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें। यह कार्रवाई साहबर अपराध के खिलाफ दुर्ग पुलिस की सख्ती और सक्रियता को दर्शाती है।
