दुर्ग : न्यूज़ 36 : शिक्षा वह प्रकाश है जो जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी आशा की नई किरण जगाता है। इसका प्रेरणादायी उदाहरण केन्द्रीय जेल दुर्ग में देखने को मिला, जहां एक आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे बंदी ने शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा देने का अनुकरणीय कार्य किया है। सुपेला, भिलाई निवासी एक बंदी वर्ष 2018 से भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 302 के प्रकरण में केन्द्रीय जेल दुर्ग में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उसने जेल प्रशासन द्वारा संचालित पाठशाला में अध्ययन शुरू किया। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच उसने 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की तथा अंग्रेजी विषय में डिस्टिंक्शन प्राप्त कर पुनर्वास की दिशा में एक सशक्त कदम है। वह स्वयं को एक शिक्षक के रूप में देखना चाहता हैं। केन्द्रीय जेल दुर्ग में संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 में महिला एवं पुरुष बंदियों ने कक्षा पहली से लेकर एमए अंतिम वर्ष तक की परीक्षाओं में भाग लिया, जिनमें से कुल 103 बंदियों ने सफलता प्राप्त की। यह उपलब्धि जेल परिसर में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सकारात्मक वातावरण को दर्शाती है। इस प्रेरणादायी सफलता के पीछे केन्द्रीय जेल दुर्ग के जेल अधीक्षक, जेल प्रशासन तथा पाठशाला में अध्ययनरत बंदियों को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
