Tuesday, September 29, 2026

भिलाई निगम आयुक्त को हटाने की मांग पर कांग्रेस पार्षदों की याचिका खारिज

भिलाई : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई नगर निगम के आयुक्त राजीव पांडेय को पद से हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि केवल बहुमत के आधार पर कोई प्रस्ताव वैध नहीं हो जाता। यदि प्रस्ताव कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना पारित किया गया है, तो राज्य सरकार को उसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह फैसला 32 पार्षदों की याचिका पर सुनाया। याचिका में एमआईसी सदस्य संदीप निरंकारी और आदित्य सिंह सहित अन्य पार्षद शामिल थे।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि नगर निगम आयुक्त राजीव पांडेय मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) और सामान्य सभा की स्वीकृति के बिना वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय ले रहे हैं। उनका कहना था कि इस कारण आयुक्त को पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
याचिका के अनुसार, 25 मार्च को आयोजित नगर निगम की विशेष बजट बैठक में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 54(2) के तहत तीन-चौथाई से अधिक बहुमत के साथ आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। पार्षदों का तर्क था कि इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई नहीं करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून की अवहेलना है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि 25 मार्च की बैठक विशेष बजट सत्र के रूप में बुलाई गई थी।

अदालत ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम नियम, 2016 के नियम 3 और 5 का हवाला देते हुए कहा कि विशेष बैठक में केवल वही विषय लिए जा सकते हैं, जो पहले से जारी सूचना और एजेंडे में शामिल हों।

कोर्ट ने कहा कि आयुक्त को हटाने का विषय बैठक के एजेंडे में शामिल ही नहीं था। इसलिए अंतिम समय में इसे प्रस्तुत कर प्रस्ताव पारित करना निर्धारित प्रक्रिया के अनुरुप नहीं माना जा सकता।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने पार्षदों की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना पारित प्रस्ताव के आधार पर राज्य सरकार को कोई कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

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