2011 से पहले के मामलों में जब्त मदिरा का न्यायालयीन आदेश पर नष्टीकरण, 11 थानों से संबंधित शराब का किया गया नियमानुसार निपटान
दुर्ग : न्यूज़ 36 : दुर्ग जिले में वर्षों से आबकारी प्रकरणों में जब्त रखी गई अनुपयोगी शराब का विधिवत नष्टीकरण किया गया। न्यायालय और कलेक्टर के आदेशानुसार की गई इस कार्रवाई में 11 थानों में वर्ष 2011 से पहले दर्ज 294 आबकारी प्रकरणों से संबंधित कुल 33,920.145 बल्क लीटर मदिरा नष्ट की गई। यह मदिरा लंबे समय तक रखे जाने के कारण मानव उपभोग के योग्य नहीं रह गई थी।
दुर्ग पुलिस के अनुसार, नष्टीकरण की कार्रवाई थाना सुपेला के अंतर्गत निर्धारित स्थल पर शराब नष्टीकरण टीम की मौजूदगी में पूरी की गई। इस दौरान पुलिस, आबकारी विभाग और राजस्व प्रशासन के अधिकारियों ने समन्वय के साथ निर्धारित प्रक्रिया का पालन कराया। कार्रवाई के लिए पर्यावरण विभाग से अनुमति भी प्राप्त की गई थी।
11 थानों के 294 प्रकरणों की शराब का निपटान
जिले के विभिन्न थानों में वर्ष 2011 से पहले दर्ज आबकारी मामलों में जब्त मदिरा को नियमानुसार सुरक्षित रखा गया था। लंबे समय तक भंडारण के बाद अनुपयोगी हो चुकी शराब के निपटान के लिए न्यायालयीन आदेश और जिलाधीश की अनुमति के आधार पर कार्रवाई की गई।
इस प्रक्रिया के तहत कुल 33,920.145 बल्क लीटर मदिरा का नष्टीकरण किया गया। इसका उद्देश्य जब्त सामग्री का नियमानुसार निपटान करना और उसके अनधिकृत उपयोग की आशंका को समाप्त करना था।
प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों की रही मौजूदगी
नष्टीकरण की कार्रवाई में आबकारी विभाग की एडीओ सुप्रिया शर्मा, एसडीएम भिलाई नगर, नगर पुलिस अधीक्षक निशान पाठक और एसडीएम उत्तम सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। मदिरा नष्टीकरण टीम की उपस्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरी कार्रवाई संपन्न कराई गई।
अवैध शराब की सूचना देने की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री से संबंधित जानकारी पुलिस को देने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि ऐसी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई का विवरण
कुल संबंधित थाने: 11
आबकारी प्रकरण: 294
नष्ट की गई मदिरा: 33,920.145 बल्क लीटर
प्रकरणों की अवधिः वर्ष 2011 से पहले
कार्रवाई का स्थान: थाना सुपेला के अंतर्गत निर्धारित स्थल
कार्रवाई का आधारः न्यायालयीन आदेश,जिलाधीश का आदेश और पर्यावरण विभाग की अनुमति
