भिलाई : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ में दुर्ग फैमिली कोर्ट में हुई नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान यदि प्रशासनिक कारणों से नियमों में बदलाव किया गया हो और वह सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू हो, तो उसे असंवैधानिक नहीं माना जा सकता।
यह फैसला एकल पीठ के न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने सुनाया। मामला वर्ष 2022 में दुर्गं फैमिली कोर्ट में स्टेनोग्राफर और सहायक ग्रेड-3 के कुल 14 पदों पर भर्ती का है। इस भर्ती के खिलाफ खुशबू देवांगन, जितेंद्र कुमार सिन्हा और प्रमोद मानिकपुरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विज्ञापन के अनुसार परीक्षा में 50 प्रश्न होने थे, लेकिन वास्तविक परीक्षा में केवल 25 प्रश्न पूछे गए। इसके अलावा परीक्षा से दो दिन पहले चयन समिति का पुनर्गठन कर प्रिंसिपल जज को उसका अध्यक्ष बना दिया गया, जिसे उन्होंने गंभीर अनियमितता बताया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि इस भर्ती के लिए करीब 3,775 आवेदन प्राप्त हुए थे। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए चयन समिति ने प्रशासनिक सुविधा के लिए प्रश्नों की संख्या घटाई, लेकिन कुल अंक 100 ही रखे गए।
कोर्ट ने माना कि यह बदलाव सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू हुआ, इसलिए इसे अनुचित या अवैध नहीं कहा जा सकता।
इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए भर्ती प्रक्रिया को वैध ठहराया और याचिकाएं निरस्त कर दी।
