बेमेतरा : न्यूज़ 36 : देवकर नगर पंचायत में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धीरे-धीरे बड़ा जनमुद्दा बनता नजर आ रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेश सिहोरे के 28 अक्टूबर से जारी आमरण अनशन को लगातार मिल रहे समर्थन ने नगर की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब इस आंदोलन में सामाजिक संगठनों के साथ राजनीतिक संगठनों की भी भागीदारी सामने आने लगी है।
गुरुवार को छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रतिनिधियों ने अनशन स्थल पहुंचकर सुरेश सिहोरे को समर्थन दिया। वहीं किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजेन्द्र साहू भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। आंदोलन स्थल पर विभिन्न संगठनों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि मामला अब केवल नगर पंचायत के भीतर की खींचतान तक सीमित नहीं रह गया है।
समर्थन देने वालों में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बेमेतरा जिलाध्यक्ष नीलेश साहू, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के बेमेतरा शहर अध्यक्ष फौजी सूर्या सिंह चौहान, शहर सचिव बलराम यादव, शहर अध्यक्ष सौरभ मानिकपुरी, गोपु निषाद (अमोरा), सुनील वर्मा, साजा खंड अध्यक्ष खड़, महामंत्री जितेंद्र राजपूत, देवकर जेसीपी अध्यक्ष कन्हैया सिन्हा, साजा खंड युवा अध्यक्ष राज साहू, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के साजा सचिव सूर्यकांत साहू, विमल साहू और आनंद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इधर, कलार समाज ने भी समर्थन का बिगुल फूंका। छत्तीसगढ़ कलार समाज, जिला बेमेतरा के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र जायसवाल ने 29 अक्टूबर को पत्र जारी कर समाज के पदाधिकारियों, मंडलेश्वरगण, महिला मंच और युवा मंच सहित समाज के लोगों से 30 अक्टूबर को अनशन स्थल पहुंचकर एकजुटता प्रदर्शित करने की अपील की है। समाज के जिला पदाधिकारियों के भी आंदोलन में शामिल होने की बात कही गई है।
आरोपों की जांच पर टिकी निगाहें
गौरतलब है कि अध्यक्ष सुरेश सिहोरे ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली, पीआईसी बैठकों, टेंडर प्रक्रिया, जेम पोर्टल से खरीदी और प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब सवाल यह है कि बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक समर्थन के बीच प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है? क्या संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी और उठाए गए सवालों पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी, या फिर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब का इंतजार है।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले में जांच और आधिकारिक जवाब को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
