Wednesday, May 27, 2026

सेक्टर-9 अस्पताल के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता, सीटू ने प्रबंधन से मांगी पारदर्शिता

अस्पताल को बचाने के लिए सीटू ने छेड़ी मुहिम

भिलाई : न्यूज़ 36 : सेक्टर-9 अस्पताल के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यूनियन ने आशंका व्यक्त की है कि अस्पताल के संचालन अथवा प्रबंधन को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसे लेकर कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और आम नागरिकों में चिंता का माहौल है।
यूनियन ने औद्योगिक संबंध विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक राहुल थोटे के माध्यम से कार्यपालक निदेशक मानव संसाधन को पत्र सौंपते हुए मांग की है कि अस्पताल से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलाकर विस्तृत चर्चा की जाए। साथ ही प्रबंधन अपनी वास्तविक योजना सार्वजनिक करे ताकि भ्रम और आशंकाएं दूर हो सकें।

कर्मचारियों और आम लोगों पर असर की आशंका

यूनियन का कहना है कि सेक्टर-9 अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि लाखों लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार है। इस अस्पताल से Bhilai Steel Plant के नियमित कर्मचारी, ठेका श्रमिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी, उनके परिवार और आसपास के नागरिक सीधे जुड़े हुए हैं।

सीटू के अनुसार वर्तमान में अस्पताल सस्ती और सुलभस्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यदि इसे निजी हाथों में सौंपा गया तो इलाज महंगा हो सकता है, व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता मिलेगी और और गरीब एवं मध्यम वर्ग की पहुंच सीमित हो सकती है। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा भावना प्रभावित होने और असंतोष बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।

सभी पक्षों को शामिल करने की मांग

यूनियन ने कहा कि सेक्टर-9 अस्पताल श्रमिकों के लंबे योगदान, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनविश्वास से निर्मित संस्था है। इसके वास्तविक स्टेकहोल्डर्स में कार्यरत कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मी, उनके आश्रित, ठेका श्रमिक, अस्पताल के डॉक्टर-कर्मचारी, ट्रेड यूनियन, सामाजिक संगठन, स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि शामिल हैं।

ऐसे में अस्पताल के भविष्य से जुड़े किसी भी निर्णय में सभी संबंधित पक्षों की राय और सहभागिता सुनिश्चित करना जरूरी है। यूनियन ने कहा कि बिना व्यापक चर्चा और सहमति के निजीकरण जैसा फैसला लेना पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत माना जाएगा।

अस्पताल को मजबूत बनाने पर जोर

सीटू ने मांग की है कि अस्पताल के निजीकरण को अंतिम विकल्प बनाने के बजाय इसे आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। यूनियन का कहना है कि संवाद, पारदर्शिता और सामूहिक भागीदारी से ही अस्पताल को मजबूत बनाया जा सकता है।

यूनियन ने प्रबंधन से अपील की है कि अस्पताल के संबंध में कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विस्तृत चर्चा की जाए और ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे अस्पताल के सार्वजनिक स्वरुप और कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

 

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