दो गुट सुलह के लिए पहुंचे थे, तभी तीसरे गुट की एंट्री और चाकूबाजी से मचा हड़कंप, अपराधियों पर लगाम कब…?
भिलाई : न्यूज़ 36 : दुर्ग जिले में चोरी, हत्या और चाकूबाजी जैसी घटनाओं को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। इसी बीच रिसाली क्षेत्र में जेवरा-सिरसा थाना प्रभारी के बेटे पर चाकू से हमला किए जाने की घटना ने पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि युवक स्कूल गया हुआ था। इस दौरान दो गुटों के बीच आपसी विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत चल रही थी। इसी बीच तीसरा गुट वहां पहुंचा और विवाद के दौरान जेवरा-सिरसा चौकी प्रभारी के बेटे पर चाकू से हमला कर दिया। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए दो नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार किया और उन्हें बाल सुधार गृह भेजने की कार्रवाई की। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद इस घटना ने इलाके में बढ़ती चाकूबाजी और युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
जब पुलिस वाले का बेटा ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या..?
इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा किया है। जिस पुलिस व्यवस्था पर आम नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए भरोसा करता है, उसी पुलिस अधिकारी के बेटे पर यदि स्कूल के आसपास चाकू से हमला हो जाए तो यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।
हालांकि इस एक घटना के आधार पर पूरे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन लगातार सामने आ रही चाकूबाजी की घटनाओं के बीच पुलिस की गश्त, संदिग्ध युवाओं की निगरानी और अपराधियों पर समय रहते कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्राइम ब्रांच की भूमिका पर भी निगाह…?
जिले में आपराधिक घटनाओं की रोकथाम और बदमाशों पर निगरानी में स्थानीय पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में सवाल यह है कि चाकूबाजी जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले युवाओं तक पुलिस की निगरानी आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रही है..? क्या संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और मजबूत करने की जरूरत है..?
अब एसपी विजय अग्रवाल की अगली रणनीति पर नजर…
लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं के बीच अब निगाहें दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल की अगली रणनीति पर टिकी हैं। क्या संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिसिंग को और मजबूत किया जाएगा..? क्या थाना और चौकी स्तर पर जिम्मेदारियों की समीक्षा होगी..? क्या चाकूबाजी और अन्य अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कोई बड़ी रणनीति बनाई जाएगी..?
फिलहाल दो नाबालिगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कार्रवाई तो की है, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है। पुलिस अधिकारी का बेटा ही चाकूबाजी का शिकार हो सकता है, तो अपराधियों में पुलिस का खौफ कितना बाकी है..?
