रु2 हजार से रु15 हजार तक के लालच में खाते, ATM, पासबुक, चेकबुक और सिम सौंपे : साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में हो रहा था इस्तेमाल
भिलाई : न्यूज़ 36 : साइबर ठगी की रकम के लेन-देन और हस्तांतरण के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले म्यूल खाताधारकों एवं एजेंटों के खिलाफ दुर्ग पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।
पुलिस ने थाना छावनी, नेवई, भिलाई नगर और एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई में कुल 14 आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की है।
पुलिस के अनुसार आरोपी ₹2 हजार से ₹15 हजार तक के कमीशन के लालच में अपने अथवा अन्य व्यक्तियों के बैंक खाते साइबर अपराधियों और एजेंटों को उपलब्ध कराते थे। खातों के साथ ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड भी दिए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन, हस्तांतरण और राशि को छिपाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत संबंधित बैंक खातों का तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण किया गया। जांच में बैंकिंग विवरण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संबंधित खातों में लाखों रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला। पूछताछ और जांच में खाताधारकों द्वारा कमीशन के बदले खाते उपलब्ध कराने की जानकारी सामने आई।
चार मामलों में कार्रवाई
दुर्ग पुलिस ने 5 अक्टूबर को थाना छावनी के अपराध क्रमांक 626/2026 और 627/2026, थाना नेवई के अपराध क्रमांक 596/2026 तथा थाना भिलाई नगर के अपराध क्रमांक 522/2026 में संबंधित आरोपियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की है। इन सभी मामलों में धारा 318(2), 318(3), 317(4) बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई है।
थाना भिलाई नगर क्षेत्र से चिरंजीवी कुमार, शिखर चौधरी और इन्द्र प्रकाश गुप्ता, थाना छावनी क्षेत्र से सागर तेलगोटे, भानुप्रताप सिंह और विजेन्द्र शर्मा तथा थाना नेवई क्षेत्र से नवीन राठौर, घनश्याम साहू, शुभम जसवाल, शुभम कलेत, खिलेन्द्र कुमार देशमुख, हरिओम देवांगन, पोषण लाल देशमुख और कविता खापर्डे के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, ATM कार्ड, चेकबुक, मोबाइल सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। साइबर ठगी की रकम के स्रोत और लेन-देन से जुडे अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
ऐसे करते थे खातों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन के लालच में बैंक खाते साइबर अपराधियों अथवा एजेंटों को उपलब्ध कराते थे। इसके बाद इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम मंगाई जाती थी और उसे अन्य खातों में स्थानांतरित किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में खाते, ATM, चेकबुक, पासबुक और सिम कार्ड का उपयोग किया जाता था।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन या आर्थिक लाभ के बदले अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक अथवा मोबाइल सिम उपलब्ध न कराएं। बैंक खाताधारक अपने खाते में होने वाले लेन-देन के लिए जिम्मेदार होते हैं। साइबर अपराध में खाते का इस्तेमाल होने पर खाताधारक भी कानूनी जांच और कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
पुलिस ने नागरिकों से कहा है कि यदि उनके बैंक खाते, ATM, पासबुक, चेकबुक या सिम कार्ड का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दुरुपयोग किए जाने की जानकारी मिले तो तत्काल संबंधित बैंक, नजदीकी पुलिस थाने अथवा साइबर अपराध हेल्पलाइन/पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत की प्राप्ति सुरक्षित रखें।
