हज को आसान तरीके से और सीखकर अदा करने पर दिया जोर
भिलाई : न्यूज़ 36 : वर्ष 2026-27 में हज यात्रा पर जाने वाले हुज्जाजे इकराम के लिए मस्जिद खैरूल अमान, सुभाष नगर, दुर्ग में एक विशेष प्रशिक्षण सत्र ‘हज आसान और सीखकर करें’ का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में भिलाई और दुर्ग से हज यात्रा पर जाने वाले सभी हज यात्रियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, जहाँ उन्हें हज से जुड़ी तमाम व्यावहारिक और धार्मिक बारीकियों से अवगत कराया गया। उल्लेखनीय है कि आगामी हज यात्रा अप्रैल 2027 में प्रस्तावित है, जिसके लिए आवेदन व अन्य प्रक्रिया शुरु हो चुकी है।
आयोजन में हाजी सैय्यद जमीर ने हज की अहमियत और उसकी फजीलत पर पूरी जानकारी दी। उन्होंने हाजियों को बताया कि यह सफर रूहानी तौर पर बेहद अहम है। इसके साथ ही उन्होंने हज यात्रा के दौरान जरूरी दस्तावेजों और करेंसी (मुद्रा) बदलाव आदि से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी दी। हाजी मीर हमीद ने हज यात्रा के दौरान उमरा करने के पूरे और मुकम्मल तौर तरीकों की जानकारी साझा की। हाजी नैय्यर इकबाल ने हज की बारीकियों और उसकी अदायगी के तरीकों पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि हज में क्या-क्या फ़र्ज़ हैं, क्या वाजिबात हैं और किस तरह से आसानी के साथ इसकी अदायगी करेंगे। हाजी नईम पाशा ने एहराम बांधने का सही तरीका सिखाया। मदीना शरीफ की जियारत के बारे में जानकारी मौलाना हाशिम (दुर्ग) ने दी गई। मौलाना हाशिम ने बताया कि मदीना में प्यारे नबी का रोजा-ए-मुबारक है, इसलिए वहाँ बहुत अदब और एहतराम के साथ चलना चाहिए।
उन्होंने हिदायत दी कि रोजे पर निगाहें नीची रखकर सलाम पेश करना चाहिए और दिल में आशिकाना अंदाज व तड़प का इजहार होना चाहिए। दरूद शरीफ का नजराना पेश करते हुए दिल में यह ख्याल रखना चाहिए कि इस शहर की गलियों में मेरे नबी का चलना हुआ है। हर वक्त दरूद पाक का विर्द, तिलावते कुरआन पाक और नमाज में मशगूल रहकर अन्य जियारत की जगहों पर जाना चाहिए। जिन मुकाम पर नमाज पढ़ने की खास अहमियत है, वहाँ जाकर नमाज जरूर अदा करनी चाहिए।
आखिर में पिछले साल हज यात्रा करके लौटे हाजी मोहम्मद नासिर कुरैशी ने अपने सफर का ब्यौरा साझा किया। उन्होंने सभी हज यात्रियों से कहा कि जो लोग हज पर जा रहे हैं, उन्हें पैदल चलने की आदत डालनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हिदायत दी कि सभी यात्री अपने ठहरने वाली बिल्डिंग का नंबर और वहाँ भारत सरकार द्वारा नियुक्त हज सहायक के नंबर जरूर अपने पास रखें।
इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हज के विभिन्न पहलुओं को समझते हुए ‘आसान हज सीखकर करने’ पर जोर देना था। कार्यक्रम के अंत में वतन की खुशहाली, उन्नति और प्रगति के लिए विशेष दुआ मांगी गई। इस मौके पर सैय्यद असलम, कलीम कुरैशी, रफीक कुरैशी, मोहम्मद सलीम, नईम पाशा, मुफ्ती सोहेल, मुफ्ती सलीम, कारी शोएब, युनूस कुरैशी, अजीज कुरैशी, साजिद , मुशीर खान और अब्दुल रसीद सहित तमाम लोग शामिल रहे।
