Tuesday, September 15, 2026

वेतन विसंगति को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारियों का टूट रहा मनोबल

20 साल में भी पदोन्नति का लाभ नहीं मिलने से आक्रोश, शासन से मांगा न्याय

भिलाई : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कैडरों में दशकों से चली आ रही वेतन विसंगति को लेकर कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का कहना है कि 24 घंटे सेवा देने के बावजूद केंद्र के समान वेतनमान न मिलने और अन्य विभागों की तुलना में पिछड़ने से सेवानिवृत्ति के समय भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। संघ ने इस संदर्भ में शासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है।

सरकार की उपेक्षा से टूट रहा स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल :  सैय्यद असलम

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कैडरों की वेतन विसंगति दूर नहीं होने से स्वास्थ्य कर्मचारियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। सेवानिवृत्ति के समय यह पीड़ा और बढ़ जाती है क्योंकि किसी भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उन्होंने बताया कि तृतीय वेतनमान में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कार्यकर्ताओं (एमपीडब्ल्यू/एएनएम- वर्तमान में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक) का वेतनमान सहायक शिक्षकों से आगे था। लेकिन बोरा वेतनमान और उसके बाद के वेतनमानों में सहायक शिक्षक आगे निकल गए। इसी तरह, सुपरवाइजर व महिला पर्यवेक्षिका जो पदोन्नत पद हैं, चतुर्थ, पांचवें, छठवें और सातवें वेतनमान में अन्य विभागों से काफी पीछे छूट गए।
इसके अलावा, स्टाफ नर्सों के साथ भी बड़ा भेदभाव हो रहा है। केंद्र सरकार में स्टाफ नर्स को नियुक्ति के समय 4200 ग्रेड पे मिलता है, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार में उन्हें केवल 2800 ग्रेड पे दिया जा रहा है। यही स्थिति लैब टेक्नीशियन, नेत्र सहायक चिकित्सा अधिकारी और बीईटीओ के पदों की भी है।

केंद्र के समान वेतन न मिलना सबसे बड़ी पीड़ा : सीबेन दानी

जिला चिकित्सालय दुर्ग के मेल स्टाफ नर्स सीबेन दानी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारी पीड़ित मानव सेवा में लगे रहते हैं। जनबल और मानव संसाधन की भारी कमी के बावजूद कर्मचारी 24 घंटे और सातों दिन अपनी सेवाएं देते हैं। उन्होंने कहा, “हमारी सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि हमें केंद्र के समान वेतनमान नहीं दिया जाता। प्रदेश के अन्य विभागों में केंद्रीय वेतनमान या बेहतर वेतन संरचना मिलने से उनका स्तर काफी अच्छा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग में लगातार विसंगति बनी हुई है।”

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20 साल बाद पदोन्नति, लेकिन वेतन में कोई फायदा नहीं : अन्नू राव

महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षिका अन्नू राव का कहना है कि जब वे विभाग में पदस्थ हुई थीं, तब उनके साथ अन्य विभागों (जैसे शिक्षा, राजस्व, पशुपालन आदि) में ज्वाइन करने वाले साथी आज कई पदोन्नतियां पा चुके हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, “हम एक ही पद पर 20 साल तक कार्य करने के बाद पदोन्नत हुए, लेकिन वेतनमान में कोई फायदा नहीं हुआ। जिस वेतनमान पर पदोन्नति मिली, वह वेतन तो हम पहले से ही प्राप्त कर रहे थे। कम से कम एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) जोड़कर पदोन्नति दी जाती, तो कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलती।”

राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के बाद भी पिछड़ रहे कर्मचारी : देवीला चंद्राकर

ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजिका देवीला चंद्राकर ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी 28 से अधिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर सफल बनाते हैं। इसके बावजूद विभाग के हर कैडर में वेतन विसंगति व्याप्त है। जो समकक्ष कैडर किसी समय वेतन के मामले में स्वास्थ्य कर्मियों से पीछे थे, आज वे दो कदम आगे का वेतन प्राप्त कर रहे हैं।

सेवानिवृत्ति पर पेंशन में बड़ा अंतर और आर्थिक नुकसान : जी मोहन राव

सुपेला में पदस्थ मलेरिया निरीक्षक (स्वास्थ्य पर्यवेक्षक) जी मोहन राव ने कहा कि वेतन विसंगति दूर न होने से कर्मचारियों को हर महीने भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया, “मैं अगले वर्ष सेवानिवृत्त होने वाला हूँ। मेरे साथ ही शिक्षा और राजस्व विभाग में नौकरी शुरू करने वाले दोस्तों की पेंशन और मेरी पेंशन निर्धारण में बड़ा अंतर होगा, क्योंकि वे दो स्टेप आगे के वेतनमान पर रिटायर होंगे। जबकि शुरुआत में (तृतीय, चतुर्थ व पांचवें वेतनमान में) हम सभी एक ही स्तर पर थे।”

जिस पद मे आए है उसी पद मे सेवानिवृत्त हो जाएंगे : नाग

सहायक नेत्र चिकित्सा अधिकारी चंद्रहास नाग ने कहा कि नेत्र सहायक चिकित्सा अधिकारी कैडर मे भी वेतन विसंगति दूर होनी चाहिए। इस कैडर में पदोन्नति नहीं के बराबर है जिस पद मे आए है उसी पद मे सेवानिवृत्त हो जाएंगे। राज्य सरकार को स्वास्थ्य विभाग के सचिव स्वास्थ्य से चर्चा कर केंद्रीय वेतन मान 8 वेतनमान के पूर्व प्रदान करना चाहिए। उन्होंने एक और विसंगति का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाग के तृतीय श्रेणी कर्मचारियों में ड्रेसर को समयमान वेतनमान नहीं मिलता है। वहीं विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी प्रदेश मे सम्मान जनक वेतन नहीं मिलता है। आया, वार्ड वाया, ओर लैब सहायक, एक्स रे सहायक डार्क रूम असिस्टेंट जैसे पदों के कर्मचारियों वर्षों पदोन्नति नहीं मिलती है। शासन को इस विसंगति की ओर ध्यान देना चाहिए।

नीचे दी गई तालिका दर्शाती है कि समय के साथ स्वास्थ्य विभाग के पद अन्य विभागों (जैसे सहायक शिक्षक) की तुलना में कैसे पीछे छूटते चले गए : तुलनात्मक वेतनमान तालिका (एमपीडब्ल्यू/एएनएम, पर्यवेक्षक एवं सहायक शिक्षक)

वेतनमान / स्केल | MPW / ANM (ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक) | पर्यवेक्षक (Supervisor) | सहायक शिक्षक (अन्य विभाग) |

तृतीय वेतनमान | 495 | 530 | 495 |
बोरा वेतनमान | 515 | 545 | 535 |
चतुर्थ वेतनमान | 925 | 975 | 975 |
संशोधित वेतनमान | 1035 | 1145 | 1175 |
पांचवां वेतनमान | 3050 | 3500 | 4500 |
ब्रह्म स्वरूप वेतनमान | 3500 | 4000 | 4500 |
छठवां वेतनमान | 5200 से 20200
(ग्रेड पे: 2200) | 5200 से 20200
(ग्रेड पे: 2800) | 9300 से 34800
(ग्रेड पे: 4200)
| सातवां वेतनमान | लेवल 5 (27500) | लेवल 7 (29800) | लेवल 8 (35400) |
(नोट: वर्तमान में MPW/ANM (अब RHO), पर्यवेक्षक और खण्ड विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी तीनों का तृतीय समयमान वेतनमान लेवल 8 निर्धारित है।)

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