Monday, September 14, 2026

जानलेवा हमले के मामले में दो आरोपियों को 10-10 साल की सजा

पुलगांव पुलिस की प्रभावी विवेचना से दोषसिद्धि

दुर्ग : न्यूज़ 36 : ग्राम करंजा भिलाई के बाजार चौक के पास युवक पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों हमला करने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को कठोर सजा सुनाई है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने आरोपी अमित दास मानिकपुरी (19) और मोहन धीमर उर्फ मोन्टू (24) को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 सहपठित धारा 3(5) के तहत दोषसिद्ध करते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

अर्थदंड नहीं चुकाने पर दोनों आरोपियों को 6-6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं धारा 296 के तहत भी दोनों को 1-1 माह के साधारण कारावास एवं 500-500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। सभी सजाएं साथ-साथ भुगताई जानी हैं।

30 जून 2025 की रात हुआ था हमला

मामला 30 जून 2025 की रात करीब 11 बजे ग्राम करंजा भिलाई के बाजार चौक के पास का है। यहां आहत आशीष ठाकुर का आरोपियों से विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए धारदार वस्तु से आहत की पीठ और कमर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर हमला कर दिया। हमले में आहत गंभीर रूप से घायल हुआ।

घटना की सूचना मिलने पर पुलगांव पुलिस ने तत्काल अपराध क्रमांक 247/2025 दर्ज कर मामले की विवेचना शुरु की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ प्रत्यक्षदर्शियों एवं संबंधित गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा चिकित्सकीय दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य जुटाकर प्रकरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सुनाया फैसला

पुलिस की विवेचना में सामने आए मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों तथा अभियोजन की प्रभावी पैरवी के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध किया। मामले में विवेचना निरीक्षक प्रकाशकांत द्वारा की गई, जबकि अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक भावेश कटारे ने प्रभावी पैरवी की दुर्ग पुलिस ने कहा कि गंभीर अपराधों में साक्ष्य-आधारित और समयबद्ध विवेचना के परिणामस्वरुप न्यायालय से लगातार दोषसिद्धि और सजा का क्रम जारी है।

दुर्ग पुलिस की अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि विवाद की स्थिति में कानून अपने हाथ में न लें। किसी भी हिंसक या आपराधिक गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। पुलिस शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए गंभीर मामलों में साक्ष्य जुटाकर प्रकरण न्यायालय के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है।

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