साहित्य – संस्कृति के संरक्षण में पुस्तकें सहायक : आचार्य डॉ. शर्मा
भिलाई : न्यूज़ 36 : विश्वकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के पावन पर्व पर साहित्य-संस्कृति मर्मज्ञ लेखक एवं पूर्व प्राचार्य उच्च शिक्षा, आचार्य डॉ. महेश चन्द्र शर्मा ने ज़िला पुस्तकालय – राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त वाचनालय दुर्ग को अपनी आठ पुस्तकें भेंट कीं। उन्होंने ग्रन्थपाल श्रीमती राजेश्वरी राणे एवं स्टाफ से संवाद करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास संस्कृत के भी उद्भट विद्वान और कवि थे। उनके सभी काव्यों में इसका स्पष्ट प्रभाव है। उनकी विश्व प्रसिद्ध के पीछे संस्कृत और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि मुख्य कारण हैं। आचार्य डॉ.शर्मा ने आगे कहा कि साहित्य और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में पुस्तकें सबसे बड़ी सहायक होती हैं। डॉ. ने अपनी रचनाएं धर्म और राजनीति-संस्कृत वाङ्मय और आधुनिक अवधारणाओं का तुलनात्मक अध्ययन, बुद्धघोषाचार्य प्रणीत सिद्धार्थ चरित का सांस्कृतिक अध्ययन, छत्तीसगढ़ में संस्कृत-प्रकाशित मेज़र रिसर्च प्रोजेक्ट रिपोर्ट,सटीक शुकनासोपदेश,गागर में सागर,साहित्य और समाज, संस्कृति के चार सोपान और प्रेरणा प्रदीप सौंपी।
इनमें पी-एच.डी एवं डी.लिट्.शोध प्रबन्ध एवं सन्दर्भ ग्रन्थ के साथ कुछ पाठ्य-पुस्तकें भी हैं। आचार्य डॉ. शर्मा की अनेक पुस्तकें विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भी निर्धारित है। उल्लेखनीय है कि जिला ग्रंथालय-वाचनालय दुर्ग में चवालीस हजार पुस्तकें हैं। पुस्तकालय अध्यक्ष श्रीमती राजेश्वरी राणे ने बताया कि चौदह सौ छियासठ पाठक यहां आजीवन सदस्य हैं, और ये पुस्तकें पाठकों के लिये उपयोगी हैं। डॉ.शर्मा को साधुवाद देते हुवे उन्होंने भविष्य में और भी सहयोग की अपेक्षा की। लेखक आचार्य डॉ.शर्मा ने भी सहर्ष उन्हें आश्वस्त किया।
