Monday, July 27, 2026

मृत प्रोपराइटर के टैक्स की वसूली वारिसों से नहीं की जा सकती : हाईकोर्ट

भिलाई की याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

बिलासपुर : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवाकर बकाया की वसूली से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि किसी एकल स्वामित्व फर्म के के मालिक की मृत्यु के बाद उसके कानूनी उत्तराधिकारियों के खिलाफ मृतक की कर देनदारी की वसूली के लिए रिकवरी नोटिस जारी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब संबंधित कानून में मृत करदाता के कानूनी वारिसों से कर वसूली का स्पष्ट प्रावधान ही नहीं है, तब ऐसी कार्रवाई कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकती।

न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने भिलाई निवासी देवन अनीशा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि किसी वैधानिक प्रावधान के अभाव में कर देनदारी स्वतः कानूनी उत्तराधिकारियों पर स्थानांतरित नहीं की जा सकती।

याचिका के अनुसार, देवन अनीशा के पति स्वर्गीय महेंद्रन रुपेश नायडू, एम/एस महेंद्रन रुपेश नायडू नाम से प्रोपराइटरशिप फर्म संचालित करते थे और सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य करते थे। वित्तीय वर्ष 2013-14 से संबंधित मामले में विभाग ने 12 अक्टूबर 2018 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
इसके बाद 30 जून 2020 को पारित आदेश में 10 लाख 74 हजार 919 रुपये का सेवा कर और इतनी ही राशि का जुर्माना लगाया गया। इस आदेश के विरुद्ध दायर अपील भी खारिज हो गई।

इसी बीच 3 मई 2023 को महेंद्रन रुपेश नायडू का निधन हो गया। इसके बाद 13 दिसंबर 2024 को जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग ने वित्त अधिनियम, 1994 तथा सीजी जीएसटी अधिनियम की धारा 87 (बी) और धारा 142 के तहत उनकी पत्नी और उनके बैंक खातों के विरुद्ध गार्निशी एवं रिकवरी नोटिस जारी कर वसूली की कार्रवाई शुरु कर दी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीलाभदुबे ने तर्क दिया कि प्रोपराइटरशिप फर्म की कोई अलग कानूनी पहचान नहीं होती। साथ ही, वित्त अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत प्रोपराइटर की मृत्यु के बाद उसके काननी उत्तराधिकारियों से सेवा कर की वसूली कर सके।

वहीं, विभाग की ओर से कहा गया कि कर निर्धारण और मांग आदेश करदाता के जीवित रहते पारित किए गए थे, इसलिए बकाया राशि की वसूली उसके कानूनी उत्तराधिकारियों से की जा सकती है।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में शबीना अब्राहम बनाम कलेक्टर ऑफ सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि न तो केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम और न ही वित्त अधिनियम में ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान है, जो मृत करदाता की देनदारी उसके कानूनी उत्तराधिकारियों से वसूलने की अनुमति देता हो।

इन आधारों पर हाईकोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को जारी गार्निशी और रिकवरी नोटिस को निरस्त कर दिया। साथ ही विभाग को निर्देश दिया कि मृतक की सेवा सेवा कर देनदारी की वसूली के लिए केवल इस आधार पर उसके कानूनी उत्तराधिकारियों के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई न की जाए।

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