भिलाई : न्यूज़ 36 : बंगीय साहित्य संस्था, भिलाई द्वारा शनिवार, 25 जुलाई प्रातः 11 बजे से प्रगति भवन, सिविक सेंटर, भिलाई में “रवीन्द्र-नजरुल उत्सव-2026” का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। लगभग दस घंटे तक चले इस सांस्कृतिक महोत्सव में साहित्य, संगीत, नृत्य और रंगमंच का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को कला और संवेदनाओं की अनुपम आभा से आलोकित कर दिया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में भिलाई की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था गीतवितान कला केंद्र को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं रवीन्द्र संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए “टैगोर लिगेसी अवार्ड-2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में प्रबीर कुमार सरकार (ई.डी. प्रोजेक्ट), सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र, नरेंद्र बंछोर (सेफी चेयरमैन), परमिंदर सिंह (महाप्रबंधक, भिलाई इस्पात संयंत्र) सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई और पूरे कार्यक्रम में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार किया।
कार्यक्रम में विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर के जीवन-दर्शन, मानवीय चिंतन, शिक्षा, संस्कृति और विश्वबंधुत्व की उनकी अवधारणा पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए गए। साथ ही कला, साहित्य, संगीत और सृजन के प्रति उनकी दूरदर्शी सोच तथा उनकी कालजयी एवं विश्वविख्यात रचनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। महान विद्रोही कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम के ओजस्वी साहित्य, मानवीय चेतना और क्रांतिकारी सृजनधर्मिता का भी भावपूर्ण स्मरण किया गया। विभिन्न साहित्यविदों ने कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर तथा विद्रोही कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से जुड़े अनेक रोचक, प्रेरक और कम ज्ञात प्रसंग साझा किए, जिन्हें उपस्थित श्रोताओं ने अत्यंत रुचि और आत्मीयता के साथ सुना।
उत्सव के विविध सत्रों में रवीन्द्र साहित्य से चयनित कविताओं का प्रभावशाली पाठ,नाट्य, रवीन्द्र संगीत एवं नज़रुल गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ, नृत्य, गीत तथा काव्य-पाठ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न गायक एवं गायिकाओं द्वारा प्रस्तुत रवीन्द्र संगीत और नज़रुल गीतों की भावपूर्ण गायकी ने पूरे सभागार को सुरों की मधुर सरिता में प्रवाहित कर दिया और श्रोताओं को देर तक अपने मोहपाश में बाँधे रखा।
बंगीय साहित्य संस्था के महासचिव एवं कार्यक्रम के कुशल संचालक श्री शुभेन्दु बागची ने आयोजन की संपूर्ण रूपरेखा के सफल संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी सहज, प्रभावी एवं रोचक मंच-संचालन शैली, साहित्यिक टिप्पणियों तथा प्रसंगानुकूल संवादों के माध्यम से उन्होंने पूरे कार्यक्रम को निरंतर गतिशील बनाए रखा और श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन करते हुए आयोजन को गरिमा, आत्मीयता एवं आकर्षण से परिपूर्ण बना दिया। संस्था की अध्यक्ष श्रीमती बानी चक्रवर्ती एवं उनकी टीम ने भी उनके साथ समन्वयपूर्ण एवं सक्रिय भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह उत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मंच नहीं था, बल्कि रवीन्द्रनाथ टैगोर और काज़ी नज़रुल इस्लाम की मानवीय चेतना, साहित्यिक वैभव और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक जीवंत सांस्कृतिक पर्व बनकर उपस्थित जनसमुदाय के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।
