ई-जीरो पालिसी में बड़ा विरोधाभास, एक ही प्रक्रिया में अलग-अलग तारीखें
भिलाई : न्यूज़ 36 : सेल की वर्तमान ई जीरो पालिसी को लेकर एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है, जिसने सैकड़ों डिप्लोमा इंजीनियरों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों और अभ्यर्थियों के बीच यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि नीति में अलग-अलग मानकों के लिए अलग-अलग तिथियां तय की गई हैं, जो स्पष्ट रूप से असमानता को दर्शाती हैं।
मौजूदा नियमों के अनुसार, सेवा अवधि की गणना 30 जून तक की जा रही है। इसी तरह, कर्मचारियों को विजिलेंस क्लियरेंस के लिए भी 30 जून तक का समय दिया गया है। यानी, इन दोनों महत्वपूर्ण पहलुओं में अंतिम तिथि जून के अंत तक मान्य है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, जब बात शैक्षणिक योग्यता की आती है, तो इसकी गणना 24 अप्रैल तक ही सीमित कर दी गई है। यही वह बिंदु है, जहां से विवाद की शुरुआत होती है। कर्मचारियों का सवाल है कि जब अन्य सभी पात्रताओं के लिए 30 जून की तिथि मान्य है, तो केवल क्वालिफिकेशन के लिए अलग तिथि क्यों? इस असंगत नीति का सीधा असर सेल के लगभग 500 और भिलाई इस्पात संयंत्र के करीब 200 डिप्लोमा इंजीनियरों पर पड़ रहा है। ये वे अभ्यर्थी हैं, जिनकी डिग्री 30 जून 2026 तक पूरी होने की संभावना है। यदि क्वालिफिकेशन की गणनां भी उसी तिथि के आधार पर की जाती, तो ये सभी परीक्षा में शामिल हो सकते थे। लेकिन वर्तमान नियमों के कारण ये योग्य होते हुए भी परीक्षा से वंचित हो रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक असंगति है, बल्कि उनके साथ सीधा अन्याय भी है। उनका तर्क है कि जब संगठन स्वयं अन्य पात्रताओं के लिए 30 जून की समय सीमा दे रहा है, तो शैक्षणिक योग्यता को लेकर कठोरता क्यों? इससे यह प्रतीत होता है कि नीति निर्माण में संतुलन और समन्वय का अभाव है। फिलहाल, यह मामला केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सैकड़ों युवाओं के करियर से जुड़ा संवेदनशील विषय बन चुका है, जिस पर जल्द और न्यायसंगत निर्णय की आवश्यकता है।
