“राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार संस्कृत” – डॉ महेशचंद्र शर्मा
भिलाई : न्यूज़ 36 : शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के संस्कृत विभाग में रुसा योजना अंतर्गत प्रख्यात विद्वान एवं साहित्यकार डॉ. महेशचंद्र शर्मा का एक विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से सम्पन्न इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन विभागाध्यक्ष प्रो. जनेंद्र कुमार दीवान ने संस्कृत भाषा में किया।
डॉ. शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर केंद्रित “संस्कृत साहित्य में भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय शिक्षा और संस्कृति की आधारशिला है। अपने विचारों में उन्होंने रामायण, महाभारत, नीति, धर्म, करुणा और मानवता जैसे विषयों पर सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए संस्कृत ग्रंथों में निहित नैतिक मूल्यों, सामाजिक चेतना और जीवन-दृष्टि की प्रासंगिकता स्पष्ट की। उन्होंने विशेष रूप से नारी शिक्षा एवं समाज में स्त्री की भूमिका पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. के. पद्मावती, ग्रंथपाल डॉ. विनोद कुमार अहिरवार, डॉ. अंशुमाला चंदनगर तथा हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. अम्बरीष त्रिपाठी उपस्थित रहे। स्वागत भाषण में डॉ. पद्मावती ने कहा कि ऐसे विद्वानों के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान की गहराई और भाषा की महिमा का साक्षात्कार होता है।
इस अवसर पर संस्कृत के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया। बी.ए. अंतिम वर्ष में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले सतीश कुमार चंद्राकर को डॉ. शर्मा ने नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने छात्रहित में महाविद्यालय की लाइब्रेरी को अपनी लिखित 40 पुस्तकों का दान भी किया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विद्वान् से अपने प्रश्न पूछे।
