दुर्ग : न्यूज़ 36 : दुर्ग जिले की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में शनिवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने नवीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय भवन, दुर्ग के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। इस अवसर पर न्यायिक अधोसंरचना के विकास के साथ डिजिटल न्यायिक सुविधाओं और सामुदायिक मध्यस्थता से जुड़ी पहलों का भी शुभारंभ किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायिक अधिकारियों ने जन-केंद्रित और तकनीक-सक्षम न्याय व्यवस्था पर जोर दिया।
कार्यक्रम में न्यायाधिपति पीपी साहू, नरेश कुमार चंद्रवंशी, रवीन्द्र कुमार अग्रवाल, विभु दत्त गुरु एवं अमितेंद्र किशोर प्रसाद उपस्थित रहे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने स्वागत उद्बोधन में नवीन न्यायालय भवन की आवश्यकता और भविष्य की न्यायिक जरूरतों के अनुरूप आधुनिक परिसर की परिकल्पना पर प्रकाश डाला। प्रस्तावित भवन से न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और न्यायार्थियों को बेहतर एवं सुव्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता पर तैयार पुस्तक ‘संधि सेतु’ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक का उद्देश्य संवाद, सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान को बढ़ावा देना है।
इस दौरान छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की सूचना प्रौद्योगिकी टीम द्वारा विकसित कैशलेस फाइन पेमेंट सुविधा, एएफआर मोबाइल एप्लीकेशन और कोर्ट फीस टिकट जनरेशन सिस्टम का शुभारंभ एवं वीडियो प्रस्तुतीकरण किया गया। इन पहलों से न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और तकनीक सक्षम बनाने में मदद मिलेगी। अपने उद्बोधन में मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सफलता तभी है, जब न्याय सुलभ, सरल, पारदर्शी और आमजन के निकट हो। उन्होंने आधुनिक अधोसंरचना, को न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण, जिला अधिवक्ता संघ दुर्ग के अध्यक्ष रमेश शर्मा, सचिव रविशंकर सिंह सहित संघ के सदस्य मौजूद रहे। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा व सचिव रविशंकर सिंह ने मुख्य न्यायाधिपति का स्वागत किया।
