दुर्ग: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व में प्रदेश संगठन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव प्रदेश प्रभारी के रूप में सचिन पायलट की नियुक्ति को माना जा रहा है। सचिन पायलट की नियुक्ति के बाद जहां प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा के संचार होने की उम्मीद की जा रही है । वहीं आज भी प्रदेश के ऐसे कई जिला संगठन है, जो निष्क्रियता की पूरी सीमा पार कर चुके हैं। बावजूद इसके जिला स्तर के संगठन में किसी भी तरह का कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है।
प्रदेश संगठन में चाहे कितना भी बदलाव हो परंतु जब तक जिला संगठन में व्यापक बदलाव नहीं होगा जमीनी कार्यकर्ताओं के उत्साह में किसी प्रकार की कोई नई ऊर्जा का संचार हो यह संभव नजर नहीं आता। अभी हाल ही में प्रदेश में नए प्रभारी सचिन पायलट के प्रथम आगमन पर दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने खुशी जाहिर की और कहा कि प्रदेश संगठन में सचिन पायलट के प्रभारी बनने से नई ऊर्जा का संचार होगा ।
परंतु वही अगर दुर्ग कांग्रेस की बात करें तो दुर्ग कांग्रेस के संगठन में पिछले कई सालों से किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है । कहने को तो यहां पर कार्यकर्ताओं की फौज सैकड़ो से भी ज्यादा है। परंतु जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे कई पदाधिकारी को अभी भी पद में रखा गया है । जिनकी निष्क्रियता पूर्व विधायक वोरा की हार का सबसे बड़ा कारण बनी। दुर्ग कांग्रेस संगठन की निष्क्रियता के कारण जमीनी कार्यकर्ताओं के मन में कई तरह के सवाल सामने आ रहे हैं । जब प्रदेश स्तर पर बड़े-बड़े बदलाव रहे हैं। तो दुर्ग शहर विधानसभा क्षेत्र में इतनी बड़ी हार होने के बावजूद भी प्रदेश संगठन द्वारा दुर्ग कांग्रेस संगठन में किसी भी तरह का कोई बदलाव न होना कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के मनोबल को गिराने का ही कार्य कर रहा है। वही दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा भी प्रदेश संगठन के बदलाव से तो प्रसन्न है, परंतु दुर्ग शहर कांग्रेस के बदलाव के बारे में कभी कोई विचार किया हो ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा । ऐसे में दुर्ग कांग्रेसी कार्यकर्ता जिन्होंने अपना जीवन कांग्रेस के लिए समर्पित कर दिया एक बार फिर उनके जेहन में निराश नजर आ रही है ।और यह निराशा अगर जल्द ही दूर नहीं हुई तो आने वाले लोकसभा चुनाव में दुर्ग शहर से कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो जाएगा। एवं कुछ महीनो बाद होने वाले नगरी निकाय चुनाव में भी निष्क्रिय संगठन का पतन निश्चित नजर आ रहा है ।
अब देखना यह है कि प्रदेश के नए प्रभारी सचिन पायलट सिर्फ रायपुर ही दौरा करते हैं, या फिर प्रदेश के कई जिला स्तरीय संगठनों की कार्यप्रणाली पर भी बारीक नजर रख जरूरी बदलाव करते हैं ।
लेख: कांग्रेसी कार्यकर्ताओ से चर्चा के आधार पर….
