भिलाई : न्यूज़ 36 : एक ही जमीन को कूटरचित दस्तावेज से अलग-अलग लोगों को रजिस्ट्री किए जाने के मामले का खुलासा न्यायालय में होने के बाद सुपेला पुलिस को तत्काल 13 मार्च को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। शिकायतकर्ता सर्वेश्वर दयाल मिश्रा की रपट पर पुलिस ने कुंजलाल, हफीजजुल्ला खान, राजू खान, राजेश प्रधान तथा खेमराज के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-B, 34, 420, 467 468 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया था। अपराध दर्ज होने के बाद राजू खान ने हाई कोर्ट में अपने वक़ील के माध्यम से एक याचिका दायर की थी कि मेरे खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज की गई है। जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनवाई की, और इस एफआईआर पर राजू खान की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, न्यायालय ने कहा है शिकायत करता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग जिला छत्तीसगढ़ दुर्ग के न्यायालय में सीआरपीसी की धारा 156( 3) के तहत याचीकर्ता और 4 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120- बी,34,420, और 468 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए अपराध क्रमांक 276 /2025 के तहत फिर दर्ज करने के लिए आवेदन दायर किया था। उन्होंने आगे तर्क दिया की विद्वान मजिस्ट्रेट ने कथित घटना के लगभग 17 वर्षों के बाद एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने वाला आदेश पारित करने में कानूनी त्रुटि की है। और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश इसलिए जारी किया गया है, क्योंकि विद्वान मजिस्ट्रेट ने मामले को आगे बढ़ाया और संबंधित पुलिस स्टेशन से रिपोर्ट मांगी और रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद रिपोर्ट पर विचार किए बिना ही कानून के स्थापित सिद्धांत विपरीत आदेश पारित कर दिया। याचीकर्ता के वकील द्वारा आगे यह भी प्रस्तुत किया गया कि ट्रायल कोर्ट यह विचार करने में सफल रहा है, शिकायतकर्ता केवल इस इरादे से किसी दुर्घटना के कारण याचीकर्ता को परेशान करने के लिए दिनांक 14. 8. 2007 को बिक्री विलेख के निष्पादन की तारीख से 17 वर्ष से अधिक समय के बाद वर्तमान शिकायत दर्ज की गई। वह प्रस्तुत करेगा की प्रतिवादी नंबर 3 शिकायतकर्ता की जमीन याचीकर्ता की जमीन से पूरी तरह अलग है क्योंकि याचीकर्ता और हफीजुल्ला ने खसरा नंबर 76/ 01 क्षेत्र 0. 90 हेक्टेयर खरीदा है, और इसे 24. 5. 2008 को शांतिलाल पटेल और उनकी पत्नी अर्थात आशा पटेल को भेज दिया है, जो उक्त जमीन पर काबिज़ थे, यह शिकायतकर्ता/ प्रतिवादी नंबर 3 ने याचीकर्ता के साथ कुछ दुर्भावना रखते हुए और बदला लेने के लिए दीवानी मामले को फौजदारी में बदल दिया, हालांकि पक्षों के बीच विवाद पूरी तरह से दीवाने प्रकृति का है। चूँकि प्रतिवादी पहले ही मामले में अपनी उपस्थिति दर कर आ चुके हैं, इसलिए उन्हें नए नोटिस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने राज्य वकील और प्रतिवादी संख्या 3 को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है, और उसके बाद याचीकर्ता के वकील को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया है, इसके बाद मामले को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। सूचीबद्ध होने की अगली तारीख तक या सीआरपीसी की धारा 173 (2) (अब बीएनएसएस की धारा 193 (3) के तहत) पुलिस रिपोर्ट, यदि कोई हो सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने तक जो पहले हो याचीकर्ता राजू खान की गिरफ्तारी अपराध संख्या 276/ 225 दिनांक 13. 3. 2025 के आरोपित एफआईआर के अनुसरण में स्थगित रहेगी। न्यायालय ने कहा है, याचिका करता जांच में पूर्ण सहयोग करेगा और जांच में सहायता के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित होगा।