पांच साल से लंबित है सेल के हजारों कर्मचारियों के 39 महीने के एरियर्स का भुगतान
भिलाई : न्यूज़ 36 : भिलाई इस्पात संयंत्र सहित सेल के हजारों कर्मचारियों के करोड़ों रुपए के लंबित एरियर्स को उच्च प्रबंधन द्वारा अब तक भुगतान नहीं किया गया है। उससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। भुगतान की मांग को लेकर यूनियनों ने प्रबंधन पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। यूनियनों द्वारा कर्मियों के लंबित सरियर्स का शोध भुगतान नहीं होने पर इस पर ब्याज दावा ठोकने की चेतावनी दी है। उल्लेखनीय है कि बीएसपी सहित सेल के बास हजार से अधिक कर्मचारियों का 39 हिने का एरियर्स पिछले सात साल से बकाया है। श्रमिक संगठनों द्वारा सतत मांग व कई बार आंदोलन करने के बाद भी सेल प्रबंधन द्वारा अब तक लंबित राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इसकी वजह सेल कर्मिनों के वेतन समझौता का अपूर्ण होना है। यूनियनों के मुताबिक समझौता की विसंगतियों को प्रबंधन द्वारा अब तक दूर नहीं किया गया है। दिल्ली में वेतन समझौता को लेकर हुई बैठक में एनजेसीएस यूनियनों ने लंबित एरियर्स भुगतान की मांग की थी। इस पर प्रबंधन ने जल् भुगतान का आश्वासन भी दिया था। लेकिन पांच साल बाद भी 39 महीने के एरियर्स का भुगतान नहीं हुआ है। एटक के महासचिव जल्द भुगतान की मांग गई है यदि जल्द ही विनोद कुमार सोनी ने बताया कि प्रबंधन से भुगतान नहीं किया गया तो 39 महीने के एरियर्स पर ब्याज की मांग की जाएगी।
सेवानिवृत्तों को हो सकता है नुकसान
हजारों सेल कर्मकारियों का वर्ष 2017 से एरियस लंबित होने से उन कर्मियों का नुकसान हो सकता है जो इस दौरान रिटायर हो गए हैं। एरियर्स भूगतान को हरी झंडी मिलने पर सेवानिवृत कार्मिको को कम राशि मिलने के आसार है। वंही सेल में मेनपावर निरंतर कम होने और यूनियनों के जानकार वरिष्ठ नेताओं के भी रिटायर होने से एरियर्स भुगतान को लेकर उच्च प्रबंधन पर भरसक दबाव नहीं बन पाएगा। प्रबंधन यूनियनों को दरकिनार कर एकतरफा अल्प सालाना बोनस दे दिया है। पिछले चार साल में दस प्रतिशत कर्मचारों रिटायर हो चुके हैं।
पहली बार बहुमत से हुआ समझौता
पांच साल पूर्व सेल कर्मियों के वेतन समझौता संबंधी हुई एंजेसीएस की बैठक समझौता ही नहीं बल्कि प्रबंधन के निर्णय को भी यूनियनों ने अवैधानिक बताया था। बैठक में सेल के इतिहास में पहली बार उच्च प्रबंधन द्वारा सर्वसमाति को परिपाटी को छोड़कर पटक बहुतमा के आधार पर वेतन सन्त एने किया का इस परंपरा का विरोध करते हुए सीटू और बीएमएस ने एमओयू पर हस्ताक्षर नही किये थे। इसके बाद इंटक, एटक व एचएमएस यूनियन ने भी एकमत से विरोध कर समझौता की विसंगतियों को दूर कर 39 महीने के एरियस व भत्ते आदि की मांग को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किया था।
