नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसलिंग रिपोर्ट पर सक्रिय हुआ प्रबंधन
सेल अध्यक्ष के साथ कमेटी के मैराथन बैठकों का दौर भी थमा
नगर सेवाएं विभाग और एक्सपासन ऑफिस के भी विभाग होंगे मर्ज
भिलाई : न्यूज़ 36 : राष्ट्रीय इस्पात उत्पादक कंपनी के भिलाई इस्पात संयंत्र के नेशनल प्रोडक्टिव काउंसलिंग ने समूचे संयंत्र में विभागवार सर्वे किया था। यह सर्वे किस तरह मैनपॉवर कम कर ज्यादा से ज्यादा कार्य क्षमता का उपयोग किए जाने को लेकर किया गया था। इसके लिए एक कमेटी का भी गठन संयंत्र स्तर पर किया गया है। और सेल चेयरमैन के साथ कमेटी की मैराथन बैठकों का दौर भी थम चुका है। बैठक का जो निष्कर्ष निकला है, उसके तहत केवल नान वर्क और माइंस एरिया ही में ही नेशनल प्रोडक्टिव काउंसलिंग की सिफारिश लागू की जाएगी। जिसमें नॉन वर्क एरिया के कुछ विभागों को मर्ज किए जाने का प्रस्तावित् है। नगर सेवाएं विभाग व एक्सपासन ऑफिस के भी विभागों को मर्ज किया जाना प्रस्तावित है। इस संबंध में सेल चेयरमैन के समक्ष अंतिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई है। अब स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन किया जाना ही शेष है।
ईटीएल और इंकास का हुआ विलय: प्रबंधन ने भी रिपोर्ट पर काम करना शुरू कर दिया है। विगत दिनों संयंत्र के भीतर एक विभाग ईटीएल और इस्पात भवन के एक विभाग इंकास का विलय कर दिया गया है। वैसे यह दोनों विभाग क्रमशः सीजीएम इलेक्ट्रिकल और सीजीएम आई एन ए के अधीन आते थे। अभी जल्द ही इस विभाग में सी एंड आईटी और टेलिकॉम विभाग के भी मर्ज करने की सुगबुगाहट है। इससे पहले भिलाई इस्पात संयंत्र में मर्चेंट मिल और बार एंड रॉड मिल को विलय करते हुए एक नया विभाग बना दिया गया था । संयंत्र के भीतर छोटे-छोटे विभागों को मिलाकर एक बड़ा विभाग बनाने की दिशा में योजना बनाई जा रही है।
कई विभागों में जरूर से अधिक मैनपॉवर
भिलाई इस्पात संयंत्र के कई विभागों में मैनपावर की अधिकता बताई जाती है इसमें से मॉडर्नाइजेशन के तहत आई यूआरएम और एसएमएस -3 भी बताए जा रहे हैं। एसएमएस 1 बंद होने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति इन दोनों विभाग में की गई थी। लेकिन आउटसोर्सिंग के चलते कर्मचारियों के पास काम की कमी है। विगत दिनों एसएमएस- 3 और यूआरएम से कर्मचारियों का अन्य विभागों में ट्रांसफर किया गया है
आउटसोर्सिंग ने छीना कर्मचारियों का काम भिलाई इस्पात संयंत्र में नियमित कार्यों को आउटसोर्सिंग के तहत करने का एक चलन सा बन गया है। मैनपावर की कमी के कारण योजना की इकाइयों के साथ-साथ पुरानी इकाइयों में भी आउटसोर्सिंग के तहत कार्य जा रहा है। जिससे उस क्षेत्र में काम कर रहे नियमित कर्मचारियों की उत्पादन पर पकड़ कम होती जा रही है। इसके बाद कर्मचारियों को कम महत्वपूर्ण स्थान पर नियुक्त किया जा रहा है।
