Sunday, August 31, 2025

आभास पटल (ऑनलाइन ) पर संस्कृत महोत्सव से जुड़े संस्कृत प्रेमी

वेद-गीता के बिना भारत की कल्पना असम्भव : डा. शर्मा

आभास पटल (ऑनलाइन ) पर संस्कृत महोत्सव से जुड़े संस्कृत प्रेमी

भिलाई : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान द्वारा 15 दिवसीय रोचक, ज्ञानवर्धक ,सरल और रोज़गार परक संस्कृत शिक्षा समारोह का शुभारम्भ विगत दिनों हुआ। आभासीय पटल (ऑनलाइन) संस्कृत भाषा के इस शिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुड़े संस्कृत व्याख्याताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को लाभ मिला। इस गूगल मीट पर छत्तीसगढ़ के साथ उत्तराखण्ड, नई दिल्ली, चण्डीगढ़, वाराणसी, लखनऊ और उज्जैन आदि से भी संस्कृत अनुरागी जुड़े। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ की कुलपति डॉ.माण्डवी सिंह ने भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर व्यापक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई विषय वस्तु नहीं जो नाटक में प्रस्तुत न की जा सके। भिलाई के आचार्य डॉ.महेशचन्द्र शर्मा ने रूपकों और अभिनय के विविध भेदों पर डाला और कहा कि यूनेस्को ने भी नाट्यशास्त्र को विश्व धरोहर माना है। इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की डॉ.पूर्णिमा केलकर ने भी नाट्यशास्त्र पर प्रकाश डाला। इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के डॉ.राजन् यादव ने गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर संस्कृत में उनके योगदान का उल्लेख किया। आचार्य डॉ.महेश शर्मा ने कि तुलसी मूलतः संस्कृत विद्वान् हैं। रामचरितमानस के मंगलाचरणों में उन्होंने बीस से अधिक सुन्दर संस्कृत पद्यों की रचना की है। डॉ.पूर्णिमा केलकर ने कहा कि राम साहित्य के सभी विद्वान् संस्कृत में डूबे हुए हैं। अमृतसर से आये डॉ.रॉबिन शर्मा ने श्रीमद्भगवद्गीता प्रश्न मंच में विद्यार्थियों से रोचक 5-5 प्रश्न किये। डॉ.महेश शर्मा ने बताया कि वेद, रामायण, महाभारत और गीता के बिना भारत की कल्पना असम्भव है। महाभारत को युद्ध का ही ग्रन्थ कहने की निराधार कहानी खत्म होनी चाहिये। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के डॉ.सौरभ दुबे ने संस्कृत को वैज्ञानिक भाषा बताते हुए विस्तार से अपनी बात रखी। डॉ.मनीष शर्मा और डॉ.पूर्णिमा केलकर ने व्याकरण के साथ काव्य प्रस्तुति हेतु भी विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान के सचिव डॉ. मनीष शर्मा इस बैठक के सूत्रधार रहे। इस गूगल मंच से ईश्वरी देवांगन, श्रुति तिवारी, सरस्वती श्रीवास्तव, श्रद्धा दुबे, आचार्य मुकेश चौबे, आचार्य हेमन्त शर्मा, ईश्वरी प्रसाद साहू, दुर्गेश नन्दिनी सोनी, रमेश कुमार उपाध्याय एवं शैलेश कुमार शर्मा आदि जुड़े।

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