पुलिस जांच में जुटी , भिलाई तीन कोर्ट परिसर के रिकॉर्ड रूम में क्लर्क का शव मिला है
भिलाई : न्यूज़ 36 : भिलाई तीन कोर्ट परिसर के पास सोमनाथ ठाकुर नाम के शख्स ने अपनी जान दी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। भिलाई तीन पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास के लोगों से पुलिस ने जानकारी इकट्ठा की है। साथ ही साथ मृतक के परिजनों को भी मौके पर बुलाकर उनसे बयान लिया गया है।
कोर्ट आने वाले लोगों ने दी जानकारी
आज मंगलवार सुबह जब न्यायालय का कामकाज शुरू होने वाला था उसी दौरान कोर्ट रूम के भीतर वहां काम करने वाले क्लर्क सोमनाथ ठाकुर का शव मिला। घटना की सूचना मिलते ही भिलाई तीन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला भेज दिया, घटना के बाद कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया,अन्य न्यायिक कर्मचारी स्तब्ध रह गए।मौत का कारण काम के दबाव होने की बात आई सामने आ रही है, पुलिस जांच में जुट गई है,
जैसे ही पुलिस को सूचना मिली मौके पर पहुंची पुलिस को मृतक की जेब से एक मोबाइल और एक एक्सरसाइज नोटबुक मिली, जिसमें नोट था इस नोट में लिखा गया था कि अत्यधिक काम का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे मानसिक तनाव में आकर उन्होंने यह कदम उठाया।
यूनियन स्तर पर इस मामले को गंभीरता से उठाया जाएगा और न्याय की मांग की जाएगी- मनोहर कुमार,अध्यक्ष न्यायिक कर्मचारी संघ
वहीं सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया घटना का कारण कार्य दबाव प्रतीत होता है, लेकिन मामले की विस्तृत जांच जारी है। न्यायालय परिसर के रिकॉर्ड रूम में ये पूरी घटना हुई है। जो न्यायालय के कर्मचारी हैं सोमनाथ ठाकुर उनका शव पुलिस ने बरामद किया है। जिसे सुपेला अस्पताल में शिफ्ट किया है। मर्ग जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पूरा विवरण दिया जाएगा। सोमनाथ ठाकुर हर दिन सुबह आठ बजे आते थे। मृतक के पास से एक नोट मिला है,जिसमें व्यक्तिगत किसी व्यक्ति से परेशान होने की बात नहीं लिखी गई है- सत्यप्रकाश तिवारी, सीएसपी
पुलिस ने प्रथम दृष्टया संभावना जताई है कि सोमनाथ ठाकुर ने खुद ही अपनी जान दी है। फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। साथ ही साथ दूसरे पहलुओं पर भी पुलिस ने जांच शुरु की है, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में कुछ बयान दे सकती है। पुलिस घटना के पीछे के सभी कारणों की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। यह घटना न्यायिक व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
