महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थानम भोपाल के अध्यक्ष ने की सराहना
भिलाई : न्यूज़ 36 : आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा की पुस्तकें छत्तीसगढ़ के बाहर भी लोकप्रिय हैं। महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थानम् भोपाल के अध्यक्ष आचार्य पं.प्रभुदयाल मिश्र ने आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा की पुस्तक “गागर में सागर” की सराहना करते हुवे उसे “बूंद में समुद्र” कहा है। उनके अनुसार इस किताब में भारतीय ज्ञान परम्परा के महत्त्वपूर्ण विषयों को भी पृष्ठभूमि में रखा गया है। ज्ञान-विज्ञान के शीर्ष संकेतकों से युक्त डा.शर्मा की यह कृति एक ज्ञान मंजूषा भी कही जा सकती है। उन्होंने वेद, उपनिषद , रामायण,महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता,बिदुरनीति, चाणक्य नीति और संस्कृत महाकाव्यों से चुनिन्दा श्लोकों की रोचक और ज्ञानवर्धक व्याख्यायें की हैं। पाठक को सही दिशा भी मिलती है।
आचार्य पं.प्रभुदयाल मिश्र ने आगे कहा कि लेखक की ज्ञान निष्ठा की यह पहचान है कि उनकी इस पुस्तक की विषय वस्तु छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लोकप्रिय समाचार पत्रों में लगातार प्रकाशित होती रही। बड़े – बड़े और गम्भीर विषयों के भी लेखक ने सरल- संक्षिप्त लिखकर भी पाठकों को पढ़ने हेतु सुविधा प्रदान की है। देश-विदेश के अनेक सफल सांस्कृतिक, शैक्षणिक और साहित्यिक भ्रमण कर चुके डॉ.शर्मा का अनुभव उनकी इस कृति में भी स्पष्ट दिखाई देता है। ज्ञान की विविधता और व्यावहारिकता देखते ही बनती हैं। आचार्य पं.प्रभुदयाल मिश्र के अनुसार ये किताब “बिंदु में सिन्धु” भी कही जा सकती है।
