Sunday, March 15, 2026

रिसाली दशहरा मैदान में चल रहे श्री मद्भागवत कथा का दूसरा दिन

भिलाई : न्यूज़ 36 : रिसाली दशहरा मैदान में चल रहे श्री मद्भागवत कथा के द्वितीय दिन सुश्री गोपिकेश्वरी देवी जी ने बताया कि सूत जी एवं शौनकादि ऋषियों के प्रसंग से शुरू करते हुए बताया कि इस कलयुग के जीवों के कल्याण का सबसे सरल, उत्तम और अति शीघ्र मार्ग केवल श्री मद्भागवत पुराण है । श्री कृष्ण भक्ति से ही जीव अपने समस्त विकारों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं । ये भी बताया गया कि यह श्री कृष्ण भक्ति निष्काम और निरंतर हो । आधा घंटा भगवान् में मन लगाया और बाकी समय संसार को मन दिया ऐसे कल्याण नहीं होगा । आंठों पहर भगवान् का चिंतन होना चाहिए ।और आगे कथा में कैसे शुकदेव जी इस संसार में प्रकट हुए और कैसे उन्हें श्री मद्भागवत पुराण कथा प्राप्त हुई ये बताया गया । फिर परीक्षित जी के जन्म कथा बताई गई । और कैसे परीक्षित जी को शार्प मिला और उनका शुकदेव जी से मिलन हुआ ये कथा बताई गई ।
राधे कृष्ण
आज श्री मद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर शुकदेव जी और परीक्षित के प्रसंग से कथा का आरंभ हुआ की शुकदेव जी से परीक्षित जी प्रश्न करते हैं कि संसार में जीव सर्वदा सदा अपने कल्याण के लिए क्या करे और जो जीव मरने वाला उसको अपने कल्याण के लिए क्या करना चाहिए ? इसका उत्तर देते हुए शुकदेव जी ने बताया कि केवल भक्तवत्सल श्री कृष्ण की श्रवण कीर्तन स्मरण भक्ति करने से जीव अपना कल्याण कर सकता ह है । कैसे भी साधन से श्रीकृष्ण चरणों में मन अनुरक्त हो, भगवान प्रसन्न हो । क्योंकि वेदों का तात्पर्य श्री कृष्ण में ही है । यज्ञों के उद्देश्य श्रीकृष्ण ही हैं । योग श्रीकृष्ण के लिए ही किये जाते हैं और समस्त कर्मों की परिसमाप्ति भी श्रीकृष्ण में ही है । ज्ञान से ब्रह्मस्वरूप श्रीकृष्ण की ही प्राप्ति होती है । तपस्या श्रीकृष्ण की प्रसन्नता के लिए ही की जाती है । श्रीकृष्ण के लिए ही धर्मों का अनुष्ठान होता है और सब गतियाॅं श्रीकृष्ण में ही समा जाती हैं ।
तो अनर्थों की शान्ति का साक्षात् साधन है केवल भगवान् का भक्तियोग । परन्तु संसार के लोग इस बात को नहीं जानते । यही समझकर श्री वेदव्यास जी ने परमहंसों की संहिता श्रीमद्भागवत की रचना की जिसको श्रवण मात्र से श्रीकृष्ण के प्रति परम प्रेममयी भक्ति हो जाती है, जिससे जीव के शोक, मोह और भय नष्ट हो जाते हैं शुकदेव जी ने कहा परीक्षित में तुम्हें यही श्रीमद्भागवत कथा करवाऊंगा । इसका लाभ यह होगा कि मृत्यु के समय भगवान की स्मृति अवश्य बनी रहे । आगे कथा में परीक्षित जी पूछने पर श्रृष्टि का विस्तार कैसे हुआ ये बताया गया । फिर मनु जी महाराज और महारानी शतरूपा की संतानों की कथा बताई । जिसमें ध्रुव जी का चरित्र और जड़ भरत जी की कथा भी बताई गई ।

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