Friday, January 16, 2026

जमीन सौदे में धोखाधड़ी 6 लाख लेकर रजिस्ट्री नहीं करने का आरोप

न्यायालय आदेश पर सिटी कोतवाली दुर्ग में अपराध दर्ज

दुर्ग : न्यूज़ 36 : जमीन विक्रय के नाम पर धोखाधड़ी के एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने थाना सिटी कोतवाली दुर्ग को अभियुक्त के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना करने के निर्देश दिए हैं।

सिटी कोतवाली पुलिस दुर्ग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रार्थी बालकृष्ण स्वर्णकार पिता स्व. चंद्रिका प्रसाद स्वर्णकार, उम्र 38 वर्ष, निवासी गया नगर वार्ड क्रमांक 4. दुर्ग द्वारा न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया था। परिवाद में आरोप लगाया गया कि अभियुक्त राजूलाल पिता शालिकराम देवदास, उम्र 55 वर्ष, निवासी कन्हैयापुरी चौक कसारीडीह, थाना पद्मनाभपुर, जिला दुर्ग ने अपनी स्वामित्व की भूमि मौजा बघेरा, वार्ड क्रमांक 56, खसरा नंबर 323/107, रकबा 2500 वर्गफीट को 6 लाख रुपये में विक्रय करने का सौदा किया।

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इकरारनामा कर राशि लेने के बाद पलटा अभियुक्त

परिवादी के अनुसार दिनांक 08 जनवरी 2021 को जिला न्यायालय परिसर दुर्ग में नोटरी के समक्ष गवाहों की उपस्थिति में विधिवत इकरारनामा निष्पादित किया गया। इस दौरान अभियुक्त को दो लाख रुपये बयाना राशि प्रदान की गई। बाद में शेष चार लाख रुपये भी बैंक चेक के माध्यम से अभियुक्त को दिए गए।

परिवादी ने आरोप लगाया कि संपूर्ण राशि प्राप्त करने के बावजूद अभियुक्त ने भूमि की रजिस्ट्री परिवादी के पक्ष में नहीं कराई। जब परिवादी द्वारा पंजीयन कराने का प्रयास किया गया, तब अभियुक्त ने उप पंजीयक कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराते हुए यह कह दिया कि भूमि विक्रय नहीं बल्कि गिरवी रखी गई थी, जिसके कारण रजिस्ट्री रोक दी गई।

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न्यायालय ने माना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध

न्यायालय द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं बैंक स्टेटमेंट के अवलोकन के बाद यह पाया गया कि अभियुक्त द्वारा कपटपूर्वक एवं बेईमानी से 6 लाख रुपये प्राप्त कर भूमि विक्रय नहीं किया गया, जो कि धोखाधड़ी की श्रेणी में आने वाला संज्ञेय अपराध है।

इन धाराओं में दर्ज होगा अपराध

न्यायालय ने थाना सिटी कोतवाली दुर्ग को निर्देशित किया है कि अभियुक्त के विरुद्ध धारा 420, 416, 34 भादवि के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विधि अनुसार विवेचना कर अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।

न्यायालय ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित निर्णय ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं साकिरी वासू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।

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