Friday, September 11, 2026

दुर्ग में 6 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को फांसी की सजा

वैज्ञानिक विवेचना से मजबूत हुआ पुलिस का केस

दुर्ग : न्यूज़ 36 : थाना मोहन नगर क्षेत्र में 06 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म एवं हत्या के गंभीर मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने आरोपी सोमेश यादव को दोषसिद्ध करते हुए मृत्युदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 06(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड एवं प्रत्येक धारा में ₹5,000 अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत 05 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड से भी दंडित किया गया है।
मृत्युदंड की पुष्टि संबंधी प्रक्रिया विधि के अनुसार माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर के समक्ष होगी।
प्रकरण में दुर्ग पुलिस ने बालिका के लापता होने की सूचना मिलते ही तत्काल पतासाजी शुरू की थी। पुलिस टीमों ने उपलब्ध तकनीकी एवं मैदानी सूचनाओं के आधार पर संभावित स्थानों पर तलाश की। पतासाजी के दौरान बालिका को एक वाहन से बरामद कर तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद पुलिस ने बिना विलंब मर्ग कायम कर शव पंचनामा, पोस्टमार्टम सहित अन्य आवश्यक वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल को सुरक्षित कर वहां से उपलब्ध भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय, DNA एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विधिवत सुरक्षित किया गया।

वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित रही विवेचना

थाना मोहन नगर के अपराध क्रमांक 133/2025 से संबंधित इस मामले में पुलिस ने विवेचना के दौरान किसी एक प्रकार के साक्ष्य पर निर्भर रहने के बजाय मौखिक, दस्तावेजी, चिकित्सकीय, परिस्थितिजन्य, जैविक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को समग्र रूप से संकलित किया।
घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा एवं आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए। आरोपी की पहचान कर उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया। आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी एवं जप्ती की गई।
आरोपी के कपड़ों एवं घटनास्थल से प्राप्त सामग्रियों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया। मृतिका के आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े, स्वाब, बाल, नाखून एवं अन्य संबंधित सामग्री विधिवत जप्त की गई। आरोपी एवं संबंधित व्यक्तियों के DNA परीक्षण के लिए नमूने प्राप्त किए गए।
घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध CCTV फुटेज एवं DVR को भी सुरक्षित कर जप्त किया गया। जप्त सामग्री को FSL एवं DNA परीक्षण के लिए विधिवत भेजा गया। प्राप्त वैज्ञानिक रिपोर्टों को चिकित्सकीय एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में शामिल किया गया।
पुलिस द्वारा प्रकरण की विवेचना को केवल परिस्थितिजन्य तथ्यों तक सीमित न रखते हुए वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों से पुष्ट किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों का विधिवत दस्तावेजीकरण कर अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने माना ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का मामला
विशेष दाण्डिक प्रकरण (पॉक्सो) क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफ.टी.एस.सी., विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग द्वारा 10 सितंबर 2026 को निर्णय पारित किया गया।
न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 5(ड) एवं 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) एवं 238(क) के अंतर्गत दोषसिद्ध किया।
न्यायालय ने प्रकरण को ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 06(1) एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड सुनाया। दोनों धाराओं में ₹5,000-₹5,000 का अर्थदंड भी लगाया गया। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड से दंडित किया गया।
न्यायालयीन आदेश के अनुसार सभी दंड एक साथ भुगताए जाने हैं। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में निर्धारित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पीड़ित परिवार को ₹7 लाख क्षतिपूर्ति का निर्देश
न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के अंतर्गत ₹7,00,000 की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया है।
दुर्ग पुलिस की कार्रवाई आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि पीड़ित परिवार को न्यायिक प्रक्रिया तक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हुए प्रकरण को साक्ष्यपूर्ण एवं विधिसम्मत तरीके से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
विशेष टीम ने संभाली थी विवेचना
प्रकरण की त्वरित कार्रवाई एवं प्रभावी विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर एवं थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा द्वारा किया गया।
पतासाजी, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलन, आरोपी की गिरफ्तारी, FSL एवं DNA परीक्षण तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में थाना मोहन नगर के विवेचक सहित संबंधित पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार का भी विशेष योगदान रहा।
बालिका की पहचान गोपनीय रखी गई
प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए अपराध करने के तरीके से संबंधित अनावश्यक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। साथ ही बालिका की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उसके नाम, फोटो, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।

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