भिलाई : न्यूज़ 36 : स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध मूर्तिकार डॉ. अंकुश देवांगन ने चांवल के छोटे से दाने पर भारत के नक्शे की पेंटिंग बनाई है। जिसमें शान से लहराते तिरंगे के साथ नीचे इंडिया भी लिखा है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से संदेश दिया है कि जननी जन्मभूमिश्च, स्वर्गादपी गरीयसी। अर्थात जिस धरा पर हमने जन्म लिया है,वह स्वर्ग से भी सुंदर है, और हर वर्ग के लोगों को इससे प्रेम करना चाहिए। अंकुश ने सूक्ष्मकला बनाने की शुरुआत 1985 में मात्र 15 वर्ष की उम्र से की थी। ताकि बढ़ रहे माओवादी हिंसक विचारधाराओं को रोकने के लिए बच्चों में सृजनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकें। उन्होंने अपने बचपने से अनुभव किया था कि जो भी बच्चे उनसे कलाकारी की कुछ नज्में सीख जाते हैं वे कभी हिंसक गतिविधियों में शामिल नहीं होते। बल्कि पढ़ाई लिखाई करके अपने परिवार का जीवन संवारते हैं। तब से वे गांव गांव में इन सूक्ष्म कलाओं की प्रदर्शनी लगाते आ रहे हैं। उनके आंदोलन का नाम भी हिंसा छोड़ो कला से नाता जोड़ो है। जिससे इन 36-40 वर्षों में हजारों बच्चों को लाभ मिला है। नक्सलमुक्त भारत के इस प्रथम स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने समस्त नागरिकों को बधाई दी है।
