8 वें वेतन आयोग से पहले पिछली तमाम विसंगति दूर करने शासन को भेजी विस्तार से जानकारी
भिलाई : न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य कर्मियों की वेतन विसंगति दूर करने की मांग की है। संघ के प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कैडरों की वेतन विसंगति कई वर्षों से लंबित है। ऐसे मे केंद्र सरकार ने 8 वां वेतन आयोग गठित कर दिया है, अभी समय है कि पिछली वेतन विसंगति को दूर कर आगामी 8 वें वेतनमान मे सभी कैडरों की वेतन विसंगति दूर की जाए।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग मे ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक व स्वास्थ्य संयोजक का ग्रेड पे छठवें वेतनमान मे पहले 1900 था लेकिन जबकि अन्य विभागों में समान योग्यताधारी तृतीय वर्ग कर्मचारी का ग्रेड पे 2400 कर दिया गया था। प्रदेश में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के लंबे आंदोलन पश्चात इसे 2200 किया गया हालांकि ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक व स्वास्थ्य संयोजक का केंद्र व अन्य राज्यों मे 2400 ग्रेड पे निर्धारित है। इसमें भी 200 रुपए कम करके 7 वें वेतन आयोग में स्लैब मे एक स्तर पीछे कर दिया गया है।
महामंत्री सैय्यद असलम ने कहा कि इस कैडर के साथ चार कैडर पदोन्नत वाले ओर प्रभावित हुए। छठवें वेतन मान में स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य सुपरवाइजर पुरुष और महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक का 2800 ग्रेड पे केंद्र व अन्य राज्यों में निर्धारित है। छत्तीसगढ़ सरकार मे 2400 रुपये निर्धारित किया। जिससे 7वे वेतनमान में इस संवर्ग को एक स्तर पीछे कर दिया गया। वहीं स्वास्थ्य सुपरवाइजर एल एच व्ही और महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक से पदोन्नत पद बी ई टी ओ अर्थात खंड विस्तार स्वास्थ्य शिक्षा प्रशिक्षण अधिकारी का वेतनमान छठवें आयोग में 2800 किया गया। जबकि केंद्र सरकार और अन्य राज्यों में इसका ग्रेड पे 4200 था। इसे 7 वें वेतनमान में एक स्तर पीछे कर दिया है। इसी क्रम में अन्य संवर्गों स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, नेत्र चिकित्सा अधिकारी, कुष्ठ कार्यकर्ता, ड्रेसर, वाहन चालक, लिपिक वर्गीय कर्मचारी और एक्स-रे टेक्नीशियन, डायलिसिस संवर्गों, ईसीजी टेक्नीशियन, चतुर्थ श्रेणी के विभिन्न पदो के साथ विसंगति करते हुए एक पदक्रम पीछे का वेतनमान निर्धारित किया गया। इस वजह से छत्तीसगढ़ प्रदेश मे स्वास्थ्य अमला प्रत्येक वेतनमान लागू होने के समय एक वेतन लेवल पीछे रह गया। हालांकि पांचवें वेतनमान में अन्य विभागों के तृतीय श्रेणी कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की शैक्षणिक योग्यता और वेतनमान के समकक्ष या इससे कम वेतनमान पर थे। हर वेतनमान मे एक पदक्रम आगे बढ़ा दिए गए।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार विभिन्न कार्यकाल में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की लंबे आंदोलन पश्चात इंदिरा मिश्रा समिति ओर राउत कमेटी ने अपनी सिफारिशों मे इस बात का उल्लेख भी किया कि वेतन विसंगति हुई है और स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग वेतन आयोग गठन किया जाना चाहिए। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग मे अनेक कैडर है जो अन्य विभागों के तुलनात्मक अध्ययन पर शैक्षिक, तकनीकी रूप से उनसे समकक्ष अथवा ज्यादा प्रभावी है। इसके बावजूद प्रदेश मे हर वेतनमान लागू करने के समय इनकी वेतन विसंगति दूर नहीं करना अपने आप मे एक बड़ा सवाल है। प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने कहा कि इसका खामियाजा हमें सेवाकाल के दौरान हो रहा है। सेवानिवृत्त के दौरान भी पेंशन निर्धारित होते समय विभिन्न देयकों के मिलने वाली राशि और पेंशन राशि सभी पर असर पड़ रहा है। विभाग मे भी समकक्ष योग्यता धारी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों मे भी वेतन विसंगति है। जिससे समयमान वेतनमान 10 वर्ष उपरांत, 20 वर्ष उपरांत और 30 वर्ष उपरांत मिलने वाला वेतनमान निर्धारण में 2000 से लेकर 5000 तक अंतर देखने में मिलता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ लगातार शासन से इस गुत्थी और वेतन विसंगति सुधार करने आंदोलन करते हुए केंद्र के समान वेतनमान देने अपील करते आ रहा है। 8 वें वेतन आयोग की सिफारिशों में इन विसंगतियों को दूर किया जा सकता है, जिन्हें पिछले तीन वेतनमान मे अनदेखा किया गया है।
