नीट यूजी 2026 रद्द किये जाने की आलोचना की, उठाए सवाल
भिलाई : न्यूज़ 36 : स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (एसआईओ) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 रद्द किये जाने की कड़ी आलोचना की है। एसआईओ छत्तीसगढ़ इकाई की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि परीक्षा से पहले सवालों के लीक होने और 22 लाख से ज़्यादा छात्रों द्वारा दी गई परीक्षा के रद्द होने से एनटीए और केंद्र सरकार की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पूरी तरह से समाप्त हो गई है। पेपर लीक रोकने के लिए कड़े क़ानून होने और नीट विवाद के बाद बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद, सरकार और एनटीए एक बार फिर भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने में नाकाम रहे हैं।
संगठन का कहना है कि ग़रीब और मध्यम-वर्गीय परिवारों के लाखों छात्र सालों-साल अपनी रातों की नींद कुर्बान करके और आर्थिक बोझ झेलकर एक सम्मानजनक भविष्य की उम्मीद में यह परीक्षा देते हैं। लेकिन आज नीट प्रशासनिक अक्षमता और संगठित भ्रष्टाचार से पैदा हुई अनिश्चितता का प्रतीक बन गया है।
संगठन का कहना है देश भर में बार-बार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों से पता चलता है कि यह संकट ढांचागत है, न कि कोई इत्तेफ़ाक। हर बार परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा होने से छात्रों का मानसिक तनाव, चिंता और असुरक्षा अधिक गहरी होती जाती है, जबकि संस्थाएं और सरकार अपनी जवाबदेही से बचते रहती हैं। अगर विभिन्न संसाधनों और क़ानूनी तंत्रों के बावजूद केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली बार-बार विफल हो रही है, तो परीक्षा प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने और एनटीए का पुनर्गठन करने पर गंभीर चर्चा करना अब ज़रुरी हो गया है। शिक्षा मंत्री को नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफ़ा देना चाहिए। संगठन ने पारदर्शी और समय-सीमा के भीतर होने वाली जांच, लीक नेटवर्क में शामिल सभी लोगों के लिए कड़ी सज़ा, और निष्पक्ष परीक्षाएं आयोजित करने में बार-बार विफल रहने के लिए एनटीए और केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की है। वहीं इस संकटकाल में उन विद्यार्थियों के साथ मज़बूती से खड़े होने की बात कही है, जिनका भरोसा एक बार फिर टूट गया है।
