पूर्व में गिरफ्तार 7 आरोपी भेजे गए न्यायिक हिरासत में
न्यूज़ : 36 : राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो ने चर्चित CSMCL ओवरटाइम भुगतान घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए CDL के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) एन. उदय राव को गिरफ्तार किया है। वहीं पूर्व में गिरफ्त्तार सात आरोपियों को पुलिस रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद विशेष न्यायालय ने न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
मामला राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 44/2024 से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता की विभित्र धाराओं के तहत जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार एन. उदय राव छत्तीसगढ़ डिस्टलरीज लिमिटेड (CDL) में वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) के पद पर कार्यरत था और CSMCL में ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड के नाम से संचालित मैन पावर सप्लाई कार्य का फील्ड संचालन संभालता था।
विवेचना में सामने आया कि CSMCL के रिकॉर्ड में कार्य ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड के नाम पर था, लेकिन फील्ड मैनेजमेंट, बिलिंग समन्वय, कर्मचारियों की व्यवस्था और भुगतान संबंधी कार्य CDL की संबद्ध कंपनी एनकेजेए की ओर से एन. उदय राव द्वारा संचालित किए जा रहे थे। आरोप है कि ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्य दिवसों की बिलिंग उसके निर्देश पर की जाती थी। जांच में यह भी पाया गया कि कथित कमीशन राशि के भुगतान को लेकर वह अरुणपति त्रिपाठी के संपर्क में रहता था और राशि आगे अनवर ठेबर तक पहुंचाई जाती थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मैन पावर एजेंसियों को विभिन्न मदों में लगभग 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें ओवरटाइम भुगतान के रूप में लगभग 101.20 करोड़ रुपये, बोनस के रूप में 12.21 करोड़ रुपये, चार अतिरिक्त कार्य दिवसों के भुगतान के रूप में 54.46 करोड़ रुपये तथा इन मदों पर सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स के रूप में लगभग 15.11 करोड़ रुपये शामिल हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि सुमीत फैसिलिटीज, प्राईमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस, अलर्ट कमाण्डोज और ईगल हंटर सॉल्यूशन्स सहित कई मैन पावर एजेंसियों को यह अतिरिक्त राशि दी गई। इनमें अकेले ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड को लगभग 34.07 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान प्राप्त हुआ।विवेचना में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया है कि कर्मचारियों को मिलने वाली राशि फर्जी और बढ़े हुए बिलों के जरिए निकाली गई तथा उसका उपयोग अधिकारियों और कथित सिंडिकेट को कमीशन देने एवं कंपनियों के आर्थिक लाभ के लिए किया गया।
पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों में नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत दरंदले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं। सभी को विशेष न्यायालय द्वारा न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।
