Saturday, March 28, 2026

बाउंड्री विवाद में व्यक्ति की मौत, बाउंड्री तोड़ने के बाद गाली-गलौज और मारपीट

आरोपी को 5 साल जेल और जुर्माना

भिलाई : न्यूज़ 36 : दुर्ग जिले के रानीतराई थाना क्षेत्र के ग्राम खपरी में बाउंड्रीवाल निर्माण को लेकर हुए विवाद में एक व्यक्ति की जान चली गई। इस मामले में पाटन स्थित अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी भगतराम पटेल (60 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 5000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।

यह घटना 10 अगस्त 2024 को हुई थी। मृतक फकीरा प्रसाद शुक्ला अपने घर के बाड़ी क्षेत्र में बाउंड्रीवाल का निर्माण करवा रहे थे। दोपहर करीब 1:30 बजे आरोपी भगतराम पटेल मौके पर पहुंचा और निर्माण का विरोध करते हुए बाउंड्री को लात मारकर तोड़ दिया। इस बात पर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

विवाद बढ़ने पर मृतक ने आरोपी को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए हाथ-मुक्कों और लात-कोहनी से फकीरा प्रसाद शुक्ला के साथ मारपीट की और उन्हें गिट्टी के ढेर में पटक दिया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
घटना के कुछ घंटे बाद मृतक को बेहोशी की हालत में घर लाया गया। परिजनों ने तत्काल डायल 112 की मदद से उन्हें पाटन अस्पताल पहुंचाया। वहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने मामले में जांच की, गवाहों के बयान दर्ज किए और फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट ने पुष्टि की कि मौत मारपीट से हुई गंभीर चोटों के कारण हुई थी। गवाहों के बयानों ने भी घटना की पुष्टि की। पुलिस ने आरोपी भगतराम पटेल को 24 अगस्त 2024 को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया था।

कोर्ट का फैसला : दोष सिद्ध, सजा तय

अपर सत्र न्यायाधीश दुलार सिंह निर्मलकर की अदालत ने सभी साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (भाग-II) के तहत दोषी पाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने जानलेवा हमला किया, जिससे मृत्यु होना संभावित था, और यह एक गंभीर अपराध है।

कठोर दंड के साथ चेतावनी

न्यायालय ने आरोपी को 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 5000 रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर 5 माह का अतिरिक्त कारावास साथ ही, आरोपी को तत्काल न्यायिक अभिरक्षा में लेकर केन्द्रीय जेल दुर्ग भेजने का आदेश दिया गया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी : समाज के लिए संदेश

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की हिंसक घटनाएं समाज के लिए खतरा हैं और ऐसे मामलों में नरमी बरतना उचित नहीं होगा। सख्त सजा से न केवल अपराधी को दंड मिलता है, बल्कि समाज में कानून का भय भी बना रहता है।

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