साजा(अभिषेक): न्यूज़ 36 : छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले में स्थित महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक, (कृषि प्रसार) डाॅ. पी.के. तिवारी को इंडियन सोसायटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन, नई दिल्ली के द्वारा गोवा में दिनाँक 29-31 जनवरी तक आयोजित डिजिटल टेक्नोलॉजीज फ़ार सस्टेनेबल फूड सिस्टम एण्ड आत्मनिर्भर भारत विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार में राष्ट्रस्तरीय सम्मान *आई.एस.ई.ई. फेलो अवार्ड* से सम्मानित किया गया है। डॉ. तिवारी को नई दिल्ली की सोसायटी के द्वारा यह सम्मान छत्तीसगढ़ राज्य के सुदूरवर्ती आदिवासी बाहुल्य
ग्रामीण अंचल बस्तर में कृषि एवं उद्यानिकी की उन्नत तकनीकों के प्रचार-प्रसार कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी महिलाओं की आमदनी सुदृढ़ करने में निभाई गई अहम् भूमिका के मद्देनजर प्रदाय किया गया है। इसके साथ ही डॉ. तिवारी का छत्तीसगढ़ राज्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अन्तर्गत जिला कोरिया में कृषि विज्ञान केन्द्र तथा कृषि महाविद्यालय की स्थापना एवं महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अंतर्गत बस्तर जिला में उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर की स्थापना करने में अहम् भूमिका रही है। राज्य में कृषि प्रसार-शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में भी इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका तथा सराहनीय योगदान रहा है। राज्य के बस्तर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित किसानों के बीच हल्दी की आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने तथा उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान में भी डॉ. तिवारी की विगत आठ वर्षों से सक्रिय एवं सकारात्मक भूमिका रही है। डॉ. तिवारी को गोवा में इस सम्मान से सम्मानित किये जाने के अवसर पर गोवा राज्य के पी.डब्ल्यू.डी. मिनिस्टर दिगम्बर कामत, गोवा चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्री की चेयरमैन श्रीमती प्रतिमा धौंड, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय,धारवाड़ के कुलपति डॉ. पी.एल. पाटिल, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के ए.डी.जी. (एग्री. एक्सटेंशन) डाॅ. आर.के. सिंह, आई.एस.ई.ई. सोसायटी, नई दिल्ली के प्रेसिडेंट डॉ. यू.एस. गौतम तथा देश के जाने-माने प्रख्यात कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. वी.वी. सदामते, प्रोफेसर जी. ईश्वरप्पा, प्रोफेसर वीर भद्रइय्याह, प्रोफेसर एस.एस. डोली, प्रोफेसर बसवप्रभु जीर्ली, प्रोफेसर एम.एस. नैन, प्रोफेसर जे.एस. मलिक, प्रोफेसर एम.एल शर्मा सहित देश के विभिन्न राज्यों से आये हुये कृषि प्रसार वैज्ञानिक उपस्थित रहे
डॉ. तिवारी का कथन : इस अवसर पर डॉ. तिवारी ने आभार व्यक्त करते हुये कहा कि देश की कृषि एवं कृषकों की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों में उन्नत तकनीकीयों को विकसित करने के साथ-साथ इन तकनीकियों को देश के कृषकों के द्वारा अंगीकृत कराये जाने में कृषि प्रसार शिक्षा व शोध संस्थानों की बहुत ही महत्वपूर्ण एवं अहम भूमिका है। देश में इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कृषि प्रसार शिक्षा-शोध तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश की कृषि विविधता व वर्तमान अर्थव्यवस्था को देखते हुये आने वाले समय में उद्यानिकी-वानिकी फसलों की बहुत ही महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक भूमिका की अपार संभावनायें हैं। अत: उद्यानिकी, वानिकी फसलों के उत्पादन तथा इनके प्रसंस्करण तकनीकियों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये देश के कृषि प्रसार शिक्षा-शोध संस्थानों का समावेश करते हुये उनको मानव-संसाधन युक्त करने तथा उनका इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की विशेष आवश्यकता है। डॉ. तिवारी ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग माननीय कुलपति प्रोफेसर रवि आर. सक्सेना जी के कुशल दिशानिर्देशन उद्यानिकी एवं वानिकी के क्षेत्र में विश्वविद्यालय इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये कटिबद्ध है तथा निरंतर सकारात्मक प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वे इस विश्वविद्यालय में कृषि प्रसार शिक्षा-शोध तन्त्र को मजबूती प्रदान करते हुये अध्ययनरत विद्यार्थियों/शोधार्थियों की उत्कृष्टता तथा उद्यानिकी कृषकों के उत्थान के लिये वचनबद्ध हैं।
आप की राय
[yop_poll id="1"]
